दिल में हिंदुस्तान रखकर तो सोचिए
आष्टा | नगरमें साहित्यकारों की संस्था भारतीय संस्कृति उत्थान परिषद सृजनश्री द्वारा कन्नौद रोड पर सरस काव्य निशा का आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित कवियों ने कविता सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया।
कार्यक्रम का संगीतज्ञ कवि श्रीराम श्रीवादी द्वारा सस्वर सरस्वती वंदना तथा अजमत उल्लाह द्वारा इस्लामिक वंदना हम्द पढ़कर शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में पहले कवि के रूप में श्याम शर्मा सलिल द्वारा सारगर्भित गीतिका पाठ किया गया। इसके बाद दिलीप संचेती द्वारा कुछ हास्य की रचनाएं पढ़ी गई। श्रीकिशन श्रोत्रिय सनन द्वारा वक्त की अहमियत बताते हुए एक रचना पढ़ी गई। वहीं शायर मेहफूज खां ने तरन्नुम में गजल पढ़ते हुए समां बांध दिया। वहीं कवि संजय जैन किला ने नायिका के नखशिख सौंदर्य का वर्णन करते हुए शुद्ध साहित्यिक श्रृंगार गीत पढ़ा। वहीं व्यंग्यकार त्रिलोक वोहरा ने कुछ हास्य क्षणिकाएं शेर पढ़कर श्रोताओं को हंसने पर मजबूर कर दिया। कवि अतुल जैन सुराना ने कहा कि हिंदी में कभी तो अपने हिन्दुस्तान रखके सोचिए। अगले कवि के रूप में जावर से अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य परिषद के संभागीय संयोजक जयनारायण राठौर ने पन्ना धाय के बलिदान को अपनी ओजपूर्ण रचना में रेखांकित किया। कजलास के कवि मूलचंद धारवां ने कुछ हास्य कविताएं पढ़कर माहौल को हास्यमय बनाया। वहीं वीर रस के कवि शैलेष शर्मा ने अपनी बुलंद आवाज में देशभक्ति का एक गीत पढ़ा। ललित बनवट ने अपनी शुद्ध साहित्यिक अंदाज में कुछ संजीदा रचनाए पढ़ी।
बेटियों पर पढ़ी एक रचना
आयोजनमें परिषद के अध्यक्ष श्रीराम श्रीवादी द्वारा बेटियों से संबंधित एक संवेदनशील रचना पढ़ी। गीतकार बाबू घायल ने वीर रस का एक गीत शहीदों की समाधि पर तिरंगा लगाना पढ़ा। अंत में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ओपी दुबे ने पुरातन साहित्यिक विधाओं जैसे सवैया छंद में रचनाएं पढ़ीं और आयोजन को गरिमा प्रदान की।
सम्मानसमारोह का हुआ आयोजन
कार्यक्रममें सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। इसमें समाजसेवी जुगल किशोर गुप्ता, नव निर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद बाबूलाल मालवीय का सम्मान किया गया। इस अवसर पर हरि बाबू गुप्ता, प्रदीप प्रगति, अनुप जैन कचरू, सुरेंद्र परमार, वीरेंद्र परमार, माणकचंद सुराना, अशोक जैन, मांगीलाल जैन, जितेंद्र फूडरा, अश्विन जैन, नितेश सुराना, निलेश सुरा