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तहसील बनने के बाद भी आधी-अधूरी सुविधाएं मिलीं

5 वर्ष पहले
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लोगों को कई कामों के लिए 30 किमी दूर जाना पड़ता है आष्टा, कार्यालय में पीने के पानी तक की नहीं है व्यवस्था
अनदेखी
कहने को तो शासन ने जावर को तहसील का दर्जा दे दिया है और पिछले छह सालों से कामकाज भी चल रहा है, लेकिन तहसील स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं अाधी-अधूरी ही मिल सकी हैं। इससे अभी भी लोगों को अपने काम कराने के लिए 30 किमी का सफर तय कर आष्टा जाना पड़ता है।

जावर नगर को तहसील का दर्जा मिले छह साल बीत चुके हैं, लेकिन पूरी तरह से सुविधाओं को देने में नजर अंदाज किया जा रहा है। इस कारण लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। इस कारण एसडीएम कोर्ट संबंधित कामों के लिए 30 किमी का सफर तय कर आष्टा तक जाना पड़ता है। इससे लोगों के समय के साथ धन की भी बर्बादी होती है। यहां पर स्टांप जैसी छोटी समस्याओं का भी हल नहीं है। इसके अलावा तहसील कार्यालय में आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। इसके अलावा स्टांप की कमी के कारण लोगों के काम समय पर नहीं होते हैं। यहां पर पटवारी पुराना अभिलेख, संशोधन पंजी, रजिस्ट्री भी नहीं होती है। लोगों ने तहसील में सुविधाएं बढ़ाने व स्थानीय स्तर पर ही भूमि जमीन की रजिस्ट्री होने की सुविधाएं बढ़ाने की मांग शासन से की है। शासन ने नगर को नई तहसील की सौगात छह साल पहले दी थी। इसका शुभारंभ उस समय के तत्कालीन जिला प्रभारी मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा व राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने किया था। उस समय दोनों मंत्रीद्वय ने तहसील में सभी सुविधाएं बढ़ाने का आश्वासन भी दिया था।

नहीं है वर्षा मापक यंत्र

तहसील कार्यालय में वर्षा मापक यंत्र लगना चाहिए। ताकि तहसील क्षेत्र में कितनी बारिश हुई इसका अनुमान लगाया जा सके।

रजिस्ट्री होना चाहिए

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कमल सिंह पहलवान ने लोगों की सुविधा के लिए तहसील मुख्यालय पर जमीन की रजिस्ट्री की संशोधन पंजी, पटवारी पुराना अभिलेख आदि के साथ ही स्टांप व अन्य सुविधाएं बढ़ाई जाने की मांग की है।

तहसील बनने के बाद लोगों को काम के लिए जाना पड़ता है आष्टा

शासन स्तर से ही बढ़नी हैं सुविधसाए

तहसील मुख्यालय पर तहसील स्तरीय सुविधाएं, स्टाफ बढ़ाने व अन्य सुविधाएं देने का काम शासन स्तर का है। -आशुतोष शर्मा, तहसीलदार

आवास सुविधा का अभाव
तहसील कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को रहने के लिए आवास की सुविधा भी नहीं है। इस कारण यहां पदस्थ कर्मचारी डेली अपडाउन करते हैं। इसी वजह से लोगों के काम समय पर नहीं हो पाते हैं। अपने काम कराने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों का इंतजार करना पड़ता है। किसान खुमान सिंह ने बताया कि जावर को तहसील का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन सुविधाओं की कमी है। इससे लोगों को छोटे कामों के लिए आष्टा ही जाना पड़ता है।

स्टाफ की स्थिति
तहसील कार्यालय में एक तहसीलदार, दो बाबू ही पदस्थ हैं। तहसील में 44 पटवारी हल्के हैं, लेकिन यहां पर 12 ही पटवारी पदस्थ हैं। एक के पास तीन से चार हल्कों का चार्ज है। इनमें अधिकांश पटवारी डेली अपडाउन करते हैं। यहां पर रिक्त पदों में एक नायब तहसीलदार, एक लिपिक, दो भृत्य, एक वसूली हेड के अलावा 32 पटवारियों की कमी बनी हुई है।

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