प्रेम पत्थर को भी बना देता है भगवान
नगरमें देर रात विराट कवि सम्मेलन का आयोजन गल चौराहे पर किया गया था। इसमें जगह-जगह से आए कवियों ने अपने व्यंगय, छंद, गीतों के साथ हास्य रस से देर रात तक लोगों को बांधे रखा।
वरिष्ठ साहित्यकार बाबूजी चांदमल धाड़ीवाल की पुण्य स्मृति में सुषमा सुरेशचंद्र धाड़ीवाल के 31 उपवास के महामृत्युंजय तप की पूर्णाहुति के अवसर पर धाड़ीवाल परिवार तथा विनीत सिंगी ने अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन गल चौराहे पर किया। इसमें देर रात तक काव्य रस का लोग आनंद लेते रहे। कवि सम्मेलन के संचालन की कमान विदिशा से आए प्रसिद्ध कवि संतोष सागर ने संभालते हुए सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ शारदाश्री उज्जैन से कराया। इसके पश्चात् दिलीप संचेती आष्टा ने संपूर्ण भारत के विशिष्ट स्थलों एवं संस्कृति का चित्रण अपने काव्य-पाठ में किया गया। इसके बाद डालचंद मनमौजी ब्यावरा ने अपनी हास्य और व्यंग्य रचनाओं एवं क्षणिकाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया। अगले क्रम में संवेदना के कवि अतुल जैन सुराना द्वारा काव्य पाठ करते हुए पहले मां की महिमा के कुछ मुक्तक पढ़े गए और अंत में वर्तमान परिस्थितियों को चित्रित करते हुये उन्होंने अपने गीत में कहा कि रोना है बेकार यहां आंसू का सौदा होता है। इसके बाद कन्हैया राज ब्यावरा ने अपनी विशिष्ट शैली में बड़ी की नजाकत के साथ मुक्तक एवं गजल पढ़ते हुये कहा गया कि प्रेम पत्थर को भी भगवान बना देता है। अगले क्रम में वीर रस के प्रसिद्ध कवि गौरी धाकड़ बरेली ने ओजपूर्ण काव्य पाठ कर श्रोताओं में नई चेतना का संचार किया गया। उन्होने चीन की बुरी नियत और अवैध घुसपैठ को आड़े हाथों लेकर भारत माता के पुत्रों का हवाला देते हुये अपनी ओजमयी वाणी द्वारा उसे अपनी रचना के माध्यम से ललकारा और कहा जिनका कद भी छोटा है अपने जवान की छाती से। इसके पश्चात् शारदाश्री उज्जैन को काव्य पाठ के लिये आमंत्रित किया गया और संचालक तथा कवियत्री के मध्य कुछ चुटीेले संवादों के पश्चात् शारदाश्री ने श्रृंगार का एक मनमोहक गीत अपने सुरीली आवाज में प्रस्तुत किया। जिसके बाद संचालक संतोष सागर विदिशा ने अपनी प्रस्तुति देते हुये मुक्तक, छंद, गीत हर विधा में उत्कृष्ट रचनाएं पढ़ी गई। उन्होंने कहा दुनिया में एकमात्र देश मेरा भारत है, जिसके पास भगवान महावीर है। अगले क्रम में काव्य-पाठ के लिए आष्टा के गीतेश्वर बाबू घायल ने संवेदना के कुछ