जिम्मेदारों की लापरवाही पड़ेगी भारी
आष्टा. इस तरह से स्टाप डेमों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
कार्यालय संवाददाता | आष्टा
पानी की समस्या से निजात पाने के लिए लाखों रुपए की लागत से नदियों नालों में स्टाप डेम बनाए थे। इनका निर्माण कार्य घटिया तरीके से होने के कारण यह खस्ताहाल अवस्था में पहुंच चुके हैं। इस वर्ष भी इनमें बारिश का पानी संचित नहीं हो पाएगा, जिससे किसानों को रबी फसल के दौरान परेशानी होगी। बारिश से पहले ग्रामीणों ने इनकी मरम्मत कराने की गुहार भी लगाई थी।
उल्लेखनीय है कि विकासखंड में करीब एक दर्जन से अधिक स्थानों पर बारिश का पानी संचय करने के उद्देश्य से लाखों रुपए की लागत से स्टाप डेम का निर्माण कराया गया था। इनके निर्माण कार्य के समय जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं देने से ठेकेदार ने जमकर घटिया सामग्री का उपयोग किया था। इसका नतीजा यह हुआ कि डेम थोड़े ही दिनों में जर्जर स्थिति में पहुंचने लगे थे। जबकि बीते कुछ वर्षों से तो स्थिति यह है कि इनमें पानी रुक ही नहीं पाता है। इस कारण रबी फसल के दौरान किसानों को पलेवा फसल में सिंचाई करने में दिक्कतें होती हैं।
मरम्मत के लिए लोग लगा चुके हैं गुहार
गांव चुपाडिय़ा स्थित पार्वती नदी में बना स्टाप डेम भी खस्ताहाल हो गया है। इस कारण इसमें पानी संचित नहीं हो पाता है। इसकी मरम्मत कराने के लिए कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों को मौखिक आवेदन देकर गुहार लगाई है। इसके बावजूद अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। इसी तरह से अन्य गांवों के लोग भी मरम्मत की मांग कर चुके हैं।
नहीं मिल पाता मवेशियों को पीने का पानी
स्टाप डेमों में पानी एकत्रित नहीं होने से गर्मी के मौसम में मवेशियों को भी पानी नहीं मिल पाता है। इस कारण किसानों को इधर-उधर ले जाकर मवेशियों को पानी पिलाना पड़ता है। इसी प्रकार डेम में पानी के अभाव में आसपास के जलस्त्रोंत भी दम तोड़ देते हैं।
इससे ग्रामीणों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि शासन लोगों को सुविधा देने के लिए लाखों रुपए खर्च करता है, लेकिन इनकी जिम्मेदारी जिनको दी जाती है वहीं इसमें लापरवाही बरतते हैं। यह समस्या हर साल होती है लेकिन कोई ध्यान नहीं देता है।
ग्राम पंचायत का काम
^जो स्टाप डेम बनाए गए हैं, उनको ग्राम पंचायत को हैंड ओवर कर दिए जाते हैं। उनके रखरखाव के लिए ध्यान देना चाहिए। दी