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प्रशंसक मिल जाएंगे पर कमी बताने वाला नहीं

7 वर्ष पहले
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व्यक्तिपरिणामों को सुधारेंगे तो वह स्वयं भी सुधरकर पूरे विश्व को सुधारने में योगदान करेंगे। दर्पण मलिनता को दूर कराता है। वहीं दर्पण किसी के काले चेहरे को साफ कराने के लिए स्वयं नहीं जाता है। व्यक्ति को मिथ्यात्व में नहीं डूबना चाहिए अज्ञानता के वैराग्य को प्राप्त करें। हमेशा ज्ञानता के साथ ही वैराग्य धारण करें।

यह बातें पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव स्थल पर आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने अपने आशीष वचन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रशंसक तो करोड़ों मिल जाएंगे, लेकिन कमी बताने वाला एक ही मिलेगा। भीतर का ज्ञान नहीं तो मुनि बनना बेकार है। संसार एक अखाड़ा है जैसा जीव कार्य करता है उसे वैसे ही परिणाम भी भोगना पड़ते हैं। जैसा कर्म करोगे वैसा

फल प्राप्त करोगे। जैसा ज्ञान है वैसा ही झलकता है। जगत में अनेक ज्ञान है, लेकिन बुद्धि से प्राप्त होने वाला ज्ञान समाप्त भी हो सकता है। वहीं केवल ज्ञान ऐसा है जो प्राप्त होने के पश्चात कभी समाप्त नहीं होता। भगवान आदिनाथ जी के केवल ज्ञान के अवसर पर जो समोशरण की रचना की गई है वह अद्वितीय है ऐसा प्रतीत होता है जैसे साक्षात भगवान का समोशरण है।

जीवनका सदुपयोग करें

मुनिश्रीने कहा कि यह मनुष्य जीवन इतनी आसानी से प्राप्त नहीं हुआ है। इसका सदुपयोग कर जीवन को सार्थक करें। प्राणों का अंत करना कर्म नहीं है। महावीर की वाणी अहिंसा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करती है। पूरा विश्व मानता है कि भारत महापुरूषों की पावन भूमि है।

प्रभुका मोक्ष कल्याणक मनाया

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव समिति के प्रचार संयोजक नरेंद्र गंगवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को महोत्सव के अंतिम दिवस पर भगवान आदिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक बड़े उत्साह और उमंग के साथ आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के ससंघ के सानिध्य में मनाया गया। प्रात:5.30 बजे से ताप्यए अभिषेक पूजन, ज्ञान कल्याणक पूजन, प्रात: 7.15 बजे कैलाश पर्वत से आदिनाथ प्रभु का मोक्ष। शिखरों पर कलश स्थापना दोपहर 1 बजे तथा गजरथ फेरी एवं प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन किया गया।