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मासिक काव्य निशा का हुआ आयोजन, कई कवियों ने सुनाई अपनी रचनाएं जिन्हें जमकर सराहा गया

7 वर्ष पहले
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साहित्य वह होता है जो विचारों को बदल दे

आष्टा. काव्य निशा में कवियों को उपहार भेंट किए गए।

कार्यालय संवाददाता | आष्टा

नगरमें सृजनश्री संस्था द्वारा मासिक काव्य निशा का आयोजन किया गया। इसमें कई स्थानों से आए कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को गुदगुदाया।

काव्य निशा में हास्य के हस्ताक्षर त्रिलोक वोहरा ने जहां हिन्दी को रेखांकित किया, वहीं डालचंद मनमोजी ने हास्य रस में समा बांध दिया। डीआर राव, बाबूलाल पटेल मूलचंद धारवां की रचनाओं ने भी अपनी उपंिस्थति दर्ज कराई। वहीं ललित बनवट द्वारा हिन्दी दिवस को मुक्तक समर्पित किए गए। पचोर के संजय सागर द्वारा गरीबदास की झोपड़ी शीर्षक से समाज की कुरीतियों का चित्रण किया गया। वहीं पचोर के ही मिथुन मिथिलेश द्वारा गणपति वंदना के बाद पढ़े गए शब्दों को श्रोताओं द्वारा सराहा गया। भगवानदास सोनी ने राजनीतिक व्यंग्य पढ़ते हुए चुटकी ली और कहा कि एक भाई भाजपा में एक भाई कांग्रेस में। गोविंद शर्मा द्वारा श्रोताओं को लोट-पोट कर दिया गया। वहीं राजेश यादव ने भी विचारों को बदल दे जो उसे साहित्य कहते हैं गीत द्वारा गोष्ठी को उर्जा दी गई।

गागरमें सागर रचना की प्रस्तुत : नगरके शैलेष शर्मा, दिलीप संचेती अजमत उल्लाह ने सारगर्भित रचनाएं पढ़कर अपनी उपस्थिति रेखाकिंत की।

वहीं संजय जैन किला ने प्रथम बार काव्य पाठ करते हुए अपनी रचना धर्मिता से सबको अवगत कराया तथा कवि श्याम शर्मा सलिल द्वारा अनोखी विधा गीतिका से गागर में सागर जैसी रचना प्रस्तुत की गई। वहीं अतुल जैन सुराना द्वारा हिन्दी दिवस पर गीत पढ़ते हुए कहा कि पहचान हमारी हिन्दी और हिन्दी से हिन्दुस्तान है।

हमनेंआंधी में दीप बाले हैं : डॉ.ओपी दुबे ब्लाक शिक्षा अधिकारी द्वारा संस्कृत और हिन्दी की विराटता बताते हुए संस्कृत में काव्य पाठ किया गया। पचोर के कन्हैया राज ने कहा कि हमनें आंधी में दीप बाले हैं। वहीं आयोजक श्रीराम श्रीवादी द्वारा सस्वर गजल पढ़कर काव्य निशा को उंचाई दी गई।

इसी क्रम में बाबू घायल ने नायक-नायिका के प्रेम की गजल में कहा कि मुझे मिले गर तेरी मुहब्बत में जिंदगी भी संवार लूंगी। इस अवसर पर अजय जैन, सुदीप जायसवाल, अशोक देशलेहरा, प्रभात धाड़ीवाल, शंकर बोड़ाने, अश्विन सुराना, नितेश सुराना, आनंदी पांचाल, नितिन जायसवाल आदि उपस्थित थे।