खस्ताहाल पुल पर सफर
आष्टा. इस तरह से पुल के पिलरों में दरारें पड़ गई हैं।
{बायपास बनने के बाद भी भारी वाहनों पर पाबंदी नहीं लग सकी
{ दिनभर में कई बार लगता है जाम, लोग होते हैं परेशान
कार्यालयसंवाददाता | आष्टा
नगरके बीच से निकले भोपाल-इंदौर पुराने हाईवे के उम्रदराज पार्वती पुल पर बायपास बनने के बाद भी वाहनों का बोझ कम नहीं हुआ है। अब हर वर्ष बारिश में बाढ़ के पानी की मार से यह खस्ताहाल होता जा रहा है। इसके बावजूद यहां से भारी वाहनों की रोकथाम के उपाय प्रशासन तथा संबंधित विभाग द्वारा नहीं किए गए हैं।
गौरतलब है कि भोपाल-इंदौर पुराने हाईवे को जोड़ने वाला पार्वती पुल काफी पुराना हो चुका है। जो अब पार्वती ब्रिज बनने के कारण उस पर हर वर्ष बाढ़ की मार झेलने से खस्ताहाल होने लगा है। जहां एक तरफ पुल की क्षमता साल दर साल घट रही है तो दूसरी तरफ आष्टा-कन्नौद हाईवे के कारण भारी वाहनों की आवाजाही इस पुल से अधिक बढ़ गई है।
क्षमतासे अधिक वाहनों का रहता है बोझ
उम्रदराजहो चुके पार्वती पुल की क्षमता मरम्मत के अभाव में लगातार घट रही है। जबकि पुल से निकलने वाले वाहनों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। कन्नौद कृषि उपज मंडी से आने वाले भारी वाहन इंदौर, शुजालपुर, देवास जाने के लिए कन्नौद रोड से बायपास जाने की बजाए पार्वती पुल से होकर निकलते हैं। पार्वती पुल की क्षमता लगभग 25 से 30 टन की है। जबकि यहां पर भारी वाहनों की लाइन लग जाती है। यदि समय रहते प्रशासन ने भारी वाहनों पर प्रतिबंध नहीं लगाया तो आने वाले वर्षों में स्थिति ओर भी खराब हो सकती है।
सौसाल की रहती है मियाद
नगरके पार्वती पुल को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं। हालांकि इसकी वास्तविक निर्माण की जानकारी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के पास भी नहीं है। विभाग के उपयंत्री के अनुसार पार्वती पुल का निर्माण तकरीबन 1947 या 49 के बीच हुआ था। इसके अनुसार पुल को अभी 70 वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं। जबकि नगर के उम्रदराज लोगों के अनुसार इस पुल को करीब 85 से 90 वर्ष हो चुके हैं। विभाग के अनुसार इस तरह के पुल की उम्र सौ साल के करीब होती है।
सर्वेमें किया था रिजेक्ट
पिछलेदो वर्ष पूर्व बीएचईएल की 335 टन वजनी ओडीसी टरबाईन मशीन को भोपाल से इंदौर की तरफ निकालने के लिए पुलों का सर्वे किया गया था। इसमें उक्त पार्वती पुल को कंपनी के इंजीनियरों के