दुकानों पर बिक रहीं दवाएं, फर्जी डिग्री वाले डॉक्टरों के भरोसे इलाज
प्राथमिक व उपस्वास्थ्य केंद्रों पर लापरवाही
विकासखंड में तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिनमें कोठरी, मैना व सिद्दीकगंज हैं। सिद्दीकगंज में ही दो डॉक्टर हैं इनमें से एक आयुष महिला डाक्टर हैं। जबकि कोठरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाईवे पर होने के बाद भी अनदेखी का शिकार बना हुआ है। यहां पर एक ही डॉक्टर पदस्थ हैं। जबकि नगर पंचायत होने के कारण क्षेत्र काफी बड़ा है। इसी प्रकार विकासखंड में उपस्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 40 है। यहां पर एमपीडब्लू व एनएएम पदस्थ हैं। इनमें से करीब 24 उपस्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जहां पर पदस्थ कर्मचारी डेली अपडाउन करते हैं। जिससे रात के समय डिलेवरी के लिए महिलाओं को सिविल अस्पताल आष्टा तक आना पड़ता है।
बेची जा रही आयुर्वेदिक दवाई
जिम्मेदारों की अनदेखी से दुकानदार आयुर्वेदिक दवाओं के अलावा अन्य बीमारियों की दवाइयां भी बेच रहे हैं। लोगों का कहना है कि गांवों से शहर की दूरी ज्यादा होने के कारण बीमार होने पर इन दुकानों से ही लोग गोली खरीदकर मरीज को खिला देते हैं। इसके परिणाम की वह नहीं सोचते हैं। इस तरह से लंबे समय से हो रहा है। जबकि मेडिकल काउंसिल के नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार की दवा के मेडिकल स्टोर के अलावा और कहीं से विक्रय पर पूरी तरह गैर कानूनी है। ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है।
अस्पताल में तेजी से बढ़ रहे बुखार के मरीज
सिविल अस्पताल में इन दिनों तेजी से मरीज बढ़ रहे हैं। हालत यह है कि सुबह की ओपीडी में मरीज संख्या 470 तक पहुंच रही है। बीते कुछ दिनों से मौसम में आए बदलाव के बाद अचानक लोग कई प्रकार की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसमें बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी, वायरल, मलेरिया शामिल है। इसके चलते सिविल अस्पताल में उपचार कराने आने वाले मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है। अस्पताल में प्रत्येक डॉक्टर के चैंबर के सामने मरीजों की कतारें देखने को मिल रही हैं। इसी तरह दवाई वितरण केंद्र पर भी मरीजों की लंबी लाइन लग रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं ध्यान
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य योजनाओं की हालत खराब है। भले ही शासन ने स्वास्थ्य मिशन के तहत तदर्थ स्वास्थ्य समितियां बना दी हो, लेकिन उनके कार्य कागजों में ही चल रहे हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी समितियों को मिलने वाली राशि के उपयोग का जमीनी सर्वे नहीं कराते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक केंद्र पर भी सुविधाओं का अभाव है।
सिविल अस्पताल में हर रोज लग रही मरीजों की कतार
भास्कर संवाददाता | आष्टा
इन दिनों मौसमी बीमारियों के साथ स्वाइन फ्लू की दस्तक ने लोगों को परेशान किया है। इससे प्रतिदिन ओपीडी से लेकर दवाई वितरण केंद्रों पर मरीजों की लाइनें लगी हुई हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में लोग किराना से लेकर गुमठियों में हरी-लाल पन्नी की दवाई लेकर जान जोखिम में डाल रहे हैं। वहीं नगर में मेडिकल संचालक मेडिकल बोर्ड तथा शासन के नियमों को फॉलो नहीं किया जा रहा है। इसके बाद भी इस तरह के मेडिकलों का निरीक्षण नहीं किया जाता है।
नगर में हर गली, मोहल्ले में मेडिकल की दुकानें संचालित की जा रही हैं। इनमें से कई मेडिकल संचालकों के पास फार्मास्टि का सर्टिफिकेट नहीं है। मालूम हो कि दो साल पहले स्वास्थ्य विभाग ने गाइड लाइन जारी की थी। इसके अनुसार प्रत्येक मेडिकल दुकानदार को मरीज को डॉक्टर द्वारा लिखे गए पर्चे के बाद ही दवाएं दी जानी थी। इसके अलावा संबंधित डॉक्टर का नाम भी अपने रजिस्टर में लिखना था। जबकि मेडिकलों पर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है।
सावधानी बरतें
यदि इस तरह से दवाई बेची जा रही है तो कार्रवाई की जाएगी। स्वाइन फ्लू को लेकर अमले को अलर्ट कर रखा है। मेडिकलों पर नियमों का पालन व कार्रवाई के अधिकार ड्रग इंस्पेक्टर को होते हैं। डॉ.प्रवीर गुप्ता, बीएमओ
सिविल अस्पताल में मरीजों की भीड़ लग रही है।
हरी व लाल पन्नी की दवाओं से उपचार
ग्रामीण अंचलों में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरुकता के अभाव के ग्रामीण बीमार होने पर दुकानों पर बिकने वालीं हरी, लाल पन्नी वाली दर्द निवारक दवाइयां ले रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग नहीं करता निरीक्षण, कई बार दवाएं कर चुकी है रियेक्शन