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गांव से दो किमी दूर उतार रहीं बसें

5 वर्ष पहले
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बस संचालक की मनमानी से यात्री परेशान

भास्कर संवाददाता | आष्टा/मैना

विकासखंड के गांवों में चलने वाली बसों के संचालकों की मनमानी पर रोक नहीं लग पा रही है। वे यात्रियों से किराया तो पूरा ले रहे हैं, लेकिन गांव में छोड़ने की बजाय बायपास पर ही उतार रहे हैं। इससे लोगों को पैदल सफर तय करना पड़ रहा है। यह स्थिति कई गांवों में बनी हुई है।

क्षेत्र के सबसे बड़े ग्राम मैना में बसों के स्टैंड पर नहीं आने से यात्री काफी परेशान हैं। बस स्टैंड पर बसों के आने का परमिट होने के बाद भी वह नहीं आ रही है। इससे यात्रियों को बस पकड़ने के लिए दो किमी का पैदल सफर तय कर जोड़ पर आना पड़ता है।

इसी तरह बस के चालक जोड़ पर ही सवारियों को भी उतारकर चले जाते हैं। इससे यात्रियों को कई दिक्कतों से होकर गुजरना पड़ता है। आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर कई बसें चल रही हैं। इनमें से अधिकांश बसों का मैना बस स्टैंड पर जाने का परमिट है। इसके बावजूद यह गांव में नहीं जाती है और यात्रियों को दो किमी दूर ईमली जोड़ पर ही उतारकर चल देती है। यात्री इसका विरोध करता है तो ड्राइवर व कंडेक्टर विवाद करने लगते हैं।

गांव तक का लिया जाता है किराया
बस में सफर के दौरान यात्रियों से गांव तक का ही किराया वसूला जाता है, लेकिन उन्हें अधर में ही छोड़ दिया जाता है। इससे यात्रियों को परेशानी के साथ नुकसान भी उठाना पड़ता है। गांव के अभिषेक नामदेव ने बताया कि बसों को अंदर लाने के लिए संचालकों को कई बार अवगत कराया गया है। इसके बाद भी आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया है। इससे दिनों दिन समस्या बढ़ती जा रही है।

यात्रियों को स्टैंड पर उतारने की बजाए बस चालक जोड़ पर ही उतार रहे हैं।

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