शब्द में शक्ति होती है- पूर्णमतिजी
श्रीपूर्णमति माताजी ने प्रवचन में बताया कि शब्द में शक्ति होती है, उसी से मंत्र बनते है परंतु बिना बिजाक्षर के उतने प्रभावशाली नहीं होते हैं। उसी मंत्र में अर्हं, ऐं, क्लीं जैसे बिजाक्षर लगने से वे अत्यंत प्रभावशाली एवं इच्छित फलदायी हो जाते हैं। स्वयं आत्म की पहचान होती है, मंत्र जाप में दिशा का भी महत्व होता है। उसके लिए पूर्व एवं उत्तर दिशा जो कि ऊर्जा का भंडार होती है को श्रेष्ठ माना गया है। व्यक्ति की इच्छाएं अनन्त होती हैं, इन इच्छाओं में नकारात्मकता एवं सकारात्मकता दोनों प्रकार की होती है। इच्छाओं को उत्पन्न करना ही दुख का कारण है, बिना मन शुद्धि के परमात्मा का दर्शन नहीं होता है। प्रवचन के पूर्व बासवाडा़ से पधारी चांदनी जैन के सुमधुर मंगलाचरण से वातावरण धर्ममय हो गया। आचार्य श्री के चित्र अनावरण का लाभ श्री कमल विनायका, आशीष विनायका, प्रकाश विनायका एवं विनायका परिवार ने प्राप्त किया। साथ ही बासवाडा़, उदयपुर, गुना, जबलपुर से पधारे साधर्मी बंधुओं ने श्री फल भेंट कर माताजी से आशीर्वाद प्राप्त किया।