ग्रंथों को समझना जरूरी

4 वर्ष पहले
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स्थानीय दिगंबर जैन बड़ा मंदिर गांधी चौक पर प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक पूज्य आर्यिका माताजी द्वारा उपस्थित धर्मालुजनों को जीनवाणी का रसास्वादन करवाया जा रहा है। इसी शृंखला में गुरुवार को पूज्य आर्यिका 105 श्री दुर्लभमति माताजी ने आचार्य कुंदन कुंद रचित ग्रंथ श्री प्रवचनसार की प्रथम गाथा का अर्थ बताते हुए कहा हमारी श्रृद्धा मजबूत होना चाहिए। आचार्यों ने जिन ग्रंथों की रचनाएं की है, उन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए उनकी गाथाओं का मर्म समझना होगा। सप्त व्यसन का त्याग किए बिना जिनवाणी सुनने, समझने की पात्रता नहीं आती। इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, नीमच से आए समाजजनों ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

दुर्लभमति माताजी

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