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हिंदी के भविष्य को लेकर कोई संदेह नहीं

7 वर्ष पहले
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हिंदीका अतीत स्वर्णिम था, वर्तमान संकटपूर्ण है, लेकिन महान भविष्य को लेकर कोई संदेह नहीं है। यह केवल भाषा नहीं, अपितु हमारी संस्कृति है। इसके प्रवाह को कोई बाधा नहीं रोक सकती। भारत विश्वगुरु बनेगा और हिंदी विश्वभाषा।

इस आशय के विचार सद्भावना मंच द्वारा आयोजित हिंदी दिवस समारोह में वक्ताओं ने व्यक्त किए। राष्ट्रपति से सम्मानित प्रभुदयाल खरे, डॉ. हरिनारायण शर्मा और नायब तहसीलदार सुधाकर तिवारी के आतिथ्य में संपन्न समारोह में संयोजक विजयप्रकाश तिवारी ने कहा कि हमंे अपनी आत्मा में बसी हिंदी के हर पक्ष पर परीक्षण और इसकी उन्नति के लिए हर संभव प्रयास करते रहना है। खरे ने हिंदी के गौरव पर प्रकाश डालती कविता सुनाई। डॉ. शर्मा ने हिंदी को दबाने के लिए बाजारी ताकतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस रूप में हमारी अस्मिता पर चोट होती रही है।

सुधाकर तिवारी ने इस बात को रेखांकित किया कि अंग्रेजी वर्चस्व के लिए और हिंदी अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। अखिलेश तिवारी ने हिंदी की अतीत से वर्तमान तक की यात्रा को बताया। संतोष गौतम ने गैर हिंदी प्रदेशों के बारे में अपने अनुभव सुनाए।

देवी जैन और प्रेमनारायण साहू ने कविताएं सुनाईं और शुभम शेरहा ने हिंदी के विकास में छात्रों की भूमिका बताई। पंकज गुप्ता ने कहा कि भाषा व्यक्ति के निर्माण का साधन है। सद्भावना मंच के राकेश राठी, सुनील वर्मा अन्य लोगों की आयोजन में सक्रिय भूमिका रही।

बरेली। हिंदीदिवस पर हुए कार्यक्रम में मौजूद लोग।