तकनीकी खामी से खाता खोलने में बाधा
अंचलके किसानों के लिए तहसील से फसल के लिए मिली राहत राशि हासिल करने के लिए अभी भी दिक्कतें खत्म नहीं हुई हैं। बैंक मामूली तकनीकी खामियों की आड़ में किसानों के खाते खोलने से इंकार कर रही हैं और किसान खाते के लिए बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
अंचल में रबी सीजन की फसलें अति वर्षा से पूरी तरह नष्ट हो गई थीं। प्राकृतिक आपदा के शिकार किसानों के लिए राज्य शासन ने राहत राशि स्वीकृत की थी। तहसील कार्यालय के माध्यम से यह राहत राशि किसानों के खाते में सीधे जमा कराई गई। बड़ी संख्या में ऐसे भी किसान थे, जिनके बैंक में खाते नहीं थे। ऐसे किसानों के खाते खुलवाने के लिए तहसील में लगातार प्रयास चल रहे हैं।
लेरहे तकनीकी आड़ : बुधवारको आलमपुर गांव का एक किसान नर्मदाप्रसाद आत्मज रामचरण सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की स्थानीय बैंक में खाता खुलवाने पहुंचा। किसान की फोटो भू-अधिकार और ऋण-पुस्तिका पर लगी थी। तहसील द्वारा जारी दस्तावेज भी उसके नर्मदाप्रसाद होने की पुष्टि कर रहे थे। बैंक अधिकारियों का कहना था कि मतदाता परिचयपत्र में नर्बदी िसंह नाम है, इसलिए खाता नहीं खोलेंगे। हालांकि परिचय पत्र में लगी फोटो और वल्दियत नर्मदाप्रसाद की थी। इसी तरह सिनवाय के एक किसान टीकाराम पुत्र लक्ष्मण सिंह का भी खाता नहीं खुल रहा है। इनके मतदाता परिचय-पत्र में नाम चंचल सिंह लिखा हुआ है। बैंकों में ऐसी ही तकनीकी खामी दिखाकर खाते नहीं खोले जा रहे हैं।
नहीं सुन रहे अधिकारियों की
स्थानीयप्रशासनिक अधिकारियों की कोशिश है कि किसानों को राहत राशि मिल जाए लेकिन बैंकें इस दिशा में धीमा कार्य कर रही हैं। किसानों को पहले ही राहत राशि में विलंब हो चुका है, इसलिए अधिकारी बार- बार यह प्रयास कर रहे हैं कि सभी किसानों के जल्द खाते खुल जाएं। सहयोगात्मक रवैया अपनाने के लिए कई बार बैंकों को लिखा भी जा चुका है, लेकिन कोई असर नहीं दिख रहा है।
सभी बैंकों में यही हाल
एककिसान भगवानदास अपना खाता खुलवाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के एक सप्ताह से भी ज्यादा समय से चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें कुछ कुछ कमी बताकर लौटा दिया जाता है। यूको बैंक में खाता खोलने के लिए देवेंद्र सिंह कई बार जा चुके हैं, लेकिन खाता नहीं खुल सका है।
कर रहे प्रमाणीकरण
^बैंकोंके रैवए से पीडि़त किसान हमारे पास रहे हैं। हम दस्तावेजों और पटवारी प्रतिवेदन के आ