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स्वास्थ्य महकमा लापरवाह

7 वर्ष पहले
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अंचलमें डेंगू ने दस्तक दे दी है। महेश्वर गांव की एक बच्ची डेंगू की ऐसी पहली शिकार है, जिसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो चुकी है। अन्य स्थानों पर भी अन्य लोगों के डेंगू से पीडि़त होने की आशंका जताई जा रही है। इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा इस ओर से लापरवाह बना हुआ है।

भास्कर द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक महेश्वर के ब्रजेश चौधरी की आठ महीने की बेटी महक डेंगू से पीडि़त है। इसका भोपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। सरकारी स्तर पर इस बात की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए अंचल में कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही ग्राम पंचायतें भी साफ- सफाई के प्रति उदासीन हैं, जिससे अन्य स्थानों पर भी यह बीमारी फैल सकती है।

चलरहा था इलाज

सामुदायिकस्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा व्यवस्था अस्त-व्यस्त रहती है। इसलिए मजबूरी में ही लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। महेश्वर के ब्रजेश चौधरी करीब एक सप्ताह पहले अपनी बेटी को दिखाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां के ढर्रे से परेशान होकर वे एक निजी चिकित्सक के यहां ले गए। तीन- चार दिन के इलाज के बाद उन्हे भोपाल जाने की सलाह दी गई। भोपाल के एक निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया। दो दिन पहले डेंगू के संदेह पर जांच हुई। अब उसे डेंगू होने की पुष्टि हो चुकी है।

नहीं होती साफ-सफाई

बारिशबंद होने के बाद मौसम में जबर्दस्त बदलाव आया है। दिन में तीखी धूप पड़ रही है और रात में तापमान में गिरावट आती जा रही है। यह मौसम बीमारियों को बढ़ावा देने वाला है। अंचल की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पेयजल के स्रोतों के आसपास ही इतनी ज्यादा गंदगी रहती है कि पानी दूषित हो रहा है। पेयजल की जांच और शुद्धिकरण का काम भी कागजों पर ही होता रहता है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी निरंकुश बने हुए हैं और कागजी खानापूर्ति के अलावा मैदानी काम नहीं कर रहे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुटबाजी की चपेट में है।

ये हैं मौजूदा हाल

स्वास्थ्यविभाग के काम के ढर्रे को एक घटना से समझा जा सकता है। पता चला है कि महेश्वर में डेंगू की खबर मिली तो विभाग का अमला यहां गुपचुप पहुंचा। गांव के एक मजदूर पन्नालाल कुशवाह को जहरीली दवाइयां छिड़कने के लिए दी गईं। उसने जब