पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति
नगरकरीब बीस किलोमीटर दूर छबारा के सरकारी हाईस्कूल के हाल-बेहाल हैं। कई विषयों की अभी तक एक भी कक्षा नहीं लगी। प्रभारी प्राचार्य और चपरासी आए दिन स्कूल से नदारद रहकर बरेली में रहकर ही कागजी खानापूर्ति करते रहते हैं। स्कूल में कोई भी गणवेश में नहीं पहुंचता और आर्थिक अनियमितताओं की कई शिकायतें हैं।
शनिवार को छबारा गांव में सरकारी हाईस्कूल, मिडिल स्कूल, प्राइमरी स्कूल और कन्या स्कूल में भास्कर ने पड़ताल की। गांव के लोग और स्कूली बच्चे खुलकर अपनी बात कहते हैं, लेकिन वे यह भी मानते हैं कि सुधार की ज्यादा उम्मीद नहीं है। अंकित दुबे तो सीधे कहते हैं कि अधिकारियों और नेताओं को सब कुछ पता है, लेकिन मिलीभगत सुधार नहीं होने दे रही है।
नहीं दी रसीद
कक्षा9 और 10 में प्रवेश लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं से 600 - 700 रुपए प्रवेश शुल्क के नाम पर लिए गए। इन्हें आज तक रसीद नहीं दी गई है। ग्रामीणों की शिकायत रही कि यह फीस स्कूल में जमा नहीं की गई है। एसएमडीसी की रकम खर्च तो दिखाई जाती है, लेकिन वास्तव में कुछ नहीं किया जाता। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में भी अनियमितता की बात सामने आई है। विज्ञान की कक्षाएं एक बार भी लगने की बात छात्रों ने कही।
कहांगया लैपटाॅप
गांवके दर्शनसिंह और मोहनलाल ने बताया कि स्कूल के लिए लैपटाप खरीदा गया है। यह लैपटाप कभी भी स्कूल में नहीं देखा गया। छात्रों ने बताया कि उन्होंने लैपटाप अथवा कंप्यूटर स्कूल में कभी नहीं देखा है। आरोप लगाया गया कि प्रभारी प्राचार्य इसे अपने घर पर रखे हुए हैं।
चुके हैं शिक्षा अधिकारी
एकसप्ताह पहले जिला शिक्षा अधिकारी एसपी त्रिपाठी छबारा पहुंचे थे। उन्होंने स्कूलों का निरीक्षण करने के साथ ही ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों की मौके पर ही जांच भी की थी। ग्रामीणों के गुस्से से अपनी सहमति जताते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया था कि वे रायसेन जाते ही कार्रवाई करेंगे। गांव के रामाधार, रूपसिंह, प्रेमनारायण अन्य लोगों ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है। कई अधिकारी इधर गुस्सा दिखाते हैं और जाकर कार्रवाई करना भूल जाते हैं।
बच्चेखोलते हैं स्कूल
स्कूलमें मौजूद बच्चों ने बताया कि हर दिन वे ही आकर स्कूल खोलते हैं। प्रभारी प्राचार्य सप्ताह में एक-दो दिन आते हैं और भृत्य भी कभी-कभी ही आता है। एक शिक्षक ने बताया कि वास्तव में भृत्य बाबू