जमीन पर नहीं उतरी घोषणाएं
करीबदो साल से इस अंचल के लोग स्वास्थ्य, शिक्षा और खेलों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाओं पर अमल का इंतजार कर रहे हैं। यदि इन पर अमल हो जाता है तो अंचल में सुविधाओं के विस्तार के साथ ही विकास का रास्ता भी खुल जाएगा।
18 मार्च 2013 को मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां पहली बार मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान आए थे। तब उम्मीद की जा रही थी कि वे बरेली को जिला बनाने की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन उन्होने इस मांग को पूरी तरह नकारते हुए कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए लोगों को यह जताया था कि वे इस अंचल को अपना मानते हैं। तभी से लोग मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल का इंतजार कर रहे हैं।
सिविलअस्पताल का इंतजार
मुख्यमंत्रीने इस बात को माना था कि अंचल की बढ़ी हुई आबादी के मान से पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। इसके लिए उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा दिए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद से लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं। कैलाश पलिया, मनीष श्रीवास्तव और रीतेश बागड़ी कहते हैं कि जितने जल्दी सिविल अस्पताल हो जाएगा, उतने जल्दी लोगों को इसके अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं मिलने लगेगीं। इससे अस्पताल में विशेषज्ञों के साथ ही स्टाफ भी बढ़ जाएगा।
नेताओं की फजीहत
अंचलके भाजपा नेताओं की इन घोषणाओं पर अमल होने से फजीहत हो रही है। बीते दिनो नगर परिषद के चुनाव में भी घोषणाओं पर अमल होने का मुद्दा जोरशोर से उठा था और मुख्यमंत्री, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कई मंत्रियों के प्रचार के लिए आने के बाद भी लोगों ने भाजपा को नकार दिया था। भाजपा के एक पदाधिकारी नाम का उल्लेख करने की शर्त पर कहते हैं कि पार्टी स्तर पर मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित कराएंगे।
नहीं खुला पॉली. कॉलेज
मुख्यमंत्रीने यह माना था कि कई दशकों तक जिले में उज्ज शिक्षा के केंद्र रहे इस नगर में तकनीकी शिक्षा के लिए पॉलीटेक्निक कॉलेज की भी जरूरत है। इसके लिए उन्होंने अगले साल ही यहां पॉलीटेक्निक कॉलेज प्रारंभ करने का वादा लोगों से किया था। अभी तक इस दिशा में भी कुछ नहीं हो पाया है।
सिमट रहा पीजी कॉलेज
जिलेका पहला कॉलेज इसी नगर में है। कई सालों तक इस कॉलेज की अलग ही प्रतिष्ठा रही, लेकिन करीब एक दशक से कॉलेज सिमटता जा रहा है। प्रोफेसरों के अभाव में कई संकायों की कक्षाएं बंद हो चुकी हैं और कॉलेज भवन भी बदहाली की चपेट में है। छात्रावास बंद पड़ा है विधि संकाय भी बंद हो जाने के कारण छात्रों की इस सरकारी कॉलेज में रुचि खत्म होती जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस कॉलेज के उन्नयन और खेलों के लिए मिनी स्टेडियम की घोषणा की थी। दो साल में इस दिशा में भी कुछ नहीं हो सका है।
अलग-अलग विभागों के काम
^सिविलअस्पताल, पॉलीटेक्निक कॉलेज और मिनी स्टेडियम अलग- अलग विभागों के काम हैं। स्थान के चयन अथवा अन्य कामों के लिए प्रशासन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई करता है। इससे अधिक कुछ हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है और ही हम कुछ कहने के लिए अधिकृत हैं। पीसीपांडेय, तहसीलदार बरेली
यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को दो साल से सिविल अस्पताल के दर्जे का इंतजार है।