हादसों और मौत के बाद भी नहीं बनाई मोघा जलाशय की सड़क
25 साल का लंबा समय बीत चुका है। इन 25 सालों में कुछ लोगों ने सड़क मार्ग खराब होने के कारण जान गंवाई तो कुछ की जलाशय में डूबने के कारण मौत हो गई। इतना सब हो जाने के बाद भी प्रशासन अब तक कोई कदम नहीं उठाया।
नगर से मात्र 3 किमी दूर विंध्याचल की वादियों के मध्य बनाया गया मोघा जलाशय शासन की अनदेखी के कारण लंबे समय से बदहाल स्थिति में हैं। जलाशय तक पहुंचने के लिए प्रशासन ने 33 साल पहले 6 करोड़ की लागत से पहुंच मार्ग बनवाया था। 3 किमी के इस मार्ग को बनाने में 7 साल का समय लगा। वहीं मोघा बांध बांध निर्माण के दौरान 500 परिवारों को यहां से विस्थापित कर आलनपुर गांव में जगह दी गई।
जलाशय तक जाने वाले मार्ग से ही यह विस्थापित परिवार आवाजाही करते हैं। आज पहुंच मार्ग बेहद खराब हो चुका है। इस मार्ग से पैदल जलकर जलाशय तक पहुंचना भी मुशिक्ल भरा साबित होता है। वहीं जलाशय पर सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण यहां हादसे होते रहते हैं। इसी मार्ग के दूसरी ओर इंदिरा आवास कॉलोनी है। इस कॉलोनी के लोग भी इसी मार्ग से गुजरते हैं।
रेस्ट हाउस भी खंडहर
30 साल पहले जलाशय के निकट सैलानियों के लिए रेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया था। जो अब खंडहर में तब्दील हो गया है। रेस्ट हाउस में लगे दरवाजे, खिड़कियां चोर उखाड़ ले गए। शेड की टीमें और लोहे की रॉडें भी चोरी हो चुकी हैं। सैलानियों के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण कई लोग यहां जान गवां चुके हैं।
पूर्व सीएम पटवा के प्रयासों से बना था मार्ग
जलाशय का निर्माण करीब 33 साल पहले तात्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के प्रयासों से बनवाए गए इस जलाशय पर उदयपुरा, बरेली, सांईखेड़ा, बम्होरी, तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर सहित अन्य जिलों से भी पर्यटक आते हैं। प्रशासनिक उदासीनता के कारण जलाशय की उपयोगिता भी कम होती जा रही है।
मार्ग का करूंगा निरीक्षण
मैंने अभी ज्वाइन किया है। मोघा जलाशय तक पहुंच मार्ग के संबंध में जानकारी लेकर मार्ग का निरीक्षण किया जाएगा। जो भी संभव होगा उसके लिए प्रयास करेंगे। -आरके पंडोले, प्रभारी एसडीओ जल संसाधन विभाग देवरी
डेम तक पहुंचाने वाली सड़क उखड़ी
3 किमी के इस मार्ग पर जगह-जगह मिटटी धंसक गई है।
होती है परेशानी
पर्यटक बालाराम एवं महेश बताते हैं कि सड़क पर गहरे गड्ढे एवं मिटटी का जमाव हो गया है कि पैदल चलना भी मुश्किल होता है। मार्ग का पुनर्निर्माण अत्यधिक आवश्यक है। वहीं जलाशय पर सैलानियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाया जाना चाहिए। जिससे सैलानी सुरक्षित तरीके से यहां के मनमोहन दृश्यों का आनंद ले सकें।