जिला स्तर पर निर्णय होने के डेढ़ माह में भी नहीं गिरा पाए खस्ताहाल भवन
करीब डेढ़ माह पहले जिला स्तर पर यह निर्णय लिया गया था कि जर्जर हो चुके अनुपयोगी स्कूल भवनों को जमींदोज कर दिया जाए, क्योंकि इन भवनों से आम लोगों को खतरा हो सकता है।
बैठक में निर्णय तो हो गया लेकिन तहसील स्तर के शिक्षकों को भवन गिराने संबंधी आदेश जारी नहीं किया गया। तहसील की 212 प्राथमिक एवं 82 माध्यमिक शालाओं के अधिकतर पुराने भवन अनुपयोगी होकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, जो कभी भी दुर्घटनाओं का सबब बन सकते हैं। वहीं पुराना छात्रावास भवन, बीईओ आफिस के पास में बना भवन,उत्कृष्ट स्कूल की जर्जर लाइब्रेरी और गर्ल्स स्कूल कैम्पस में तीन भवन जर्जर अवस्था में हैं। इन्हीं स्थानों पर बने नए भवनों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं जिससे छात्रों और शिक्षकों को भी खतरा बना रहता है। इन भवनों के खिड़की दरवाजे, कवेलू,चादरें लोग निकाल निकाल कर ले जा रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी सब कुछ अपनी आंखों से देखते हुए भी अनजान बने हैं।
पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव
अनुपयोगी स्कूल भवनों के पीटीए अध्यक्षों ने जिला शिक्षाधिकारी, ब्लाक शिक्षाधिकारी से भवनों को गिराने की अनुमति मांगी, लेकिन नगरीय क्षेत्र के माध्यमिक शाला बेगमगंज के अलावा किसी को भी भवन गिराने की अनुमति नहीं दी गई। इस संबंध में ब्लाक शिक्षाधिकारी राजेश इनवाती का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र समाधान निकाला जाएगा।
यहां भी हैं जर्जर भवन
उत्कृष्ट स्कूल परिसर में पूर्व छात्रावास, पुस्तकालय भवन, बीईओ कार्यालय के पास एचएम निवास, गर्ल्स स्कूल कैम्पस में राजकीय प्राथमिक शाला के दो भवन, खिरिया नारायणदास व गढ़ोईपुर सहित गंभीरिया स्कूल संचालित होने वाला विशाल भवन अनुपयोगी है जिनके आसपास शालाएं संचालित हो रही हैं।
कई पुराने स्कूल भवन जर्जर अवस्था में हैं पर इन्हें नहीं गिराया जा रहा।