82 माध्यमिक शालाओं में नहीं हैं अंग्रेजी के शिक्षक
शहर के एक भी माध्यमिक स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक नहीं है। ऐसे में दूसरे विषयों के शिक्षकों को अंग्रेजी विषय पढ़ाना पड़ रहा है। यह हालत शहर ही नहीं पूरी तहसील में बने हुए हैं। इससे आठवीं तक के बच्चों को अंग्रेजी का अक्षर ज्ञान ही मिल रहा है। ऐसे में बच्चों के नतीजों पर इसका बुरा असर पड़ने की आशंका है।
शहर के माध्यमिक 7 स्कूल हैं। इनमें खिरिया नारायणदास, गढ़ोईपुरा, माध्यमिक शाला, हदाईपुर, नवीन शाहपुर, उत्कृष्ट विद्यालय एवं एमएलवी गल्र्स स्कूल शामिल हैं। इनमें अंग्रेजी विषय का एक भी शिक्षक नहीं है।
तहसील की 82 माध्यमिक शालाओं में से 39 स्कूलों में गणित शिक्षक है 43 में गणित शिक्षक भी नहीं है। इसमें गणित व विज्ञान समूह को एक माना गया है। जिसके आधार पर 39 शिक्षक पदस्थ हैं।विज्ञान समूह में 87 एवं भाषा समूह में 55 शिक्षक पदस्थ हैं। अन्य विषयों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पालक भागीरथ प्रसाद, सैयद चांद अली, कस्तूरचंद पंथी, नर्बदा प्रसाद, मकसूद अली आदि का कहना है कि हम सभी अपने बच्चों को यह सोचकर सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे है कि हमारे बच्चे आगे चलकर कुछ बन सकें, लेकिन जानकारी मिली कि स्कूलों में अंग्रेजी के शिक्षक ही नहीं है तो अफसोस होता है कि अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिल क्यों कराया। उनका भविष्य तो बनने से रहा।
अतिथि शिक्षक रखने का नहीं है प्रावधान
जहां एक ओर अन्य विषय के अतिथि शिक्षक रखे जा सकते हैं, लेकिन अंग्रेजी विषय के लिए शासन की ओर से अतिथि शिक्षक रखने का प्रावधान नहीं है। जो है उनसे ही काम चलाया जा रहा है। पूरे स्कूलों में ऐसी ही स्थिति है। अंग्रेजी के अध्यापक ही नहीं मिल रहे हैं। दूसरे विषयों के शिक्षक अंग्रेजी विषय पढ़ाते हैं। पद भरे जाएंगे तब ही व्यवस्था हो सकेगी। एसपी त्रिपाठी, जिला शिक्षाधिकारी
अंग्रेजी शिक्षक न होने से बच्चों को होती है इस विषय की पढ़ाई करने में परेशानी।