कोर्ट फीस से मिलेगी राहत
14फरवरी को चेक बाउंस के प्रकरण प्राथमिकता से निपटाने के लिए विशेष तौर पर मासिक लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, ताकि अदालतों में मुकदमों के अनावश्यक बोझ को कम किया जा सके। ऐसे सभी मामले जिसमें पक्षकार को लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस के मामलों में लोक अदालत के माध्यम से राहत मिलेगी। साथ ही कोर्ट फीस के बोझ एवं जुर्माना आदि से भी निजात मिलेगी। सरकार ने विशेष तौर पर प्रतिमाह लोक अदालत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
यह बात शनिवार को न्यायालय परिसर में चेक बाउंस और ऋण प्रकरण पर आधारित एक दिवसीय विधिक साक्षरता शिविर में अपर सत्र न्यायाधीश कमल जोशी ने पक्षकारों के समक्ष कही। उन्होंने पक्षकारों के अधिवक्ताओं से इस संबंध में पहल कर सभी चेक बाउंस एवं बैंक कर्ज मामलों को आपसी समझौते के लिए लोक अदालत में लाने का आव्हान किया। श्री जोशी ने ऐसे सभी मामलों को 14 फरवरी को लगने वाली लोक अदालत में रखने पर जोर दिया ताकि लेनदार व्यक्ति की जो राशि वर्षों से देनदार के पास फंसी हुई है वह उसे प्राप्त हो सके। साथ ही देनदार व्यक्ति सजा और जुर्माने से बच सके। इसके अतिरिक्त जिन बेरोजगारों एवं किसानों ने बैंको से कर्ज लिया है और उसकी तो किश्तें दे रहे हैं और कर्ज चुका रहे हैं, वह भी आपसी समझौते के तहत विशेष छूट का लाभ लोक अदालत के द्वारा लेकर समझौता कर सकते हैं।
व्यवहार न्यायाधीश सपना पोर्ते, सामाजिक न्याय विभाग की उप संचालक प्रमिला वाईकर,अधिवक्ता एसके तिवारी,सेंट्रल बैंक शाखा प्रबंधक डीके श्रीवास्तव ने भी लोक अदालत को लेकर अपने अपने विचार रखे। संचालन न्यायाधीश चन्द्रसेन मुवेल ने किया।
शिविर को संबोधित करते न्यायाधीश कमल जोशी उपस्थितजन।