व्यवस्था बदली| जलस्तर बढ़ने पर पुराने इंटेकवेल में जल जाती थीं मोटरें, शहरवासियों को होती थी परेशानी।
बैतूल। पानी में मोटरों के डूब जाने से अब शहर की पेयजल सप्लाई प्रभावित नहीं होगी। दरअसल नगरपालिका ने नया इंटेकवेल बनने के बाद दो-दो टनों की तीन मोटरों को जंजीरों की मदद से 25 फीट की ऊंचाई पर लगवा दिया है। अब ये मोटरें पानी में नहीं डूबेगी। पहले पुराने इंटेकवेल में पानी सप्लाई देने वाली यह मोटरें जलस्तर बढ़ने से डूब जाती थीं, जिससे सप्लाई बार-बार प्रभावित होती थी। वहीं मोटरों के जलने पर होने वाला लाखों खर्च भी बच जाएगा।
नगरपालिका ने 1972 में माचना नदी के किनारे इंटेकवेल बनाया था। इसमें लगी मोटरों से पानी फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। थोड़ी सी बारिश होने पर इस पुराने इंटेकवेल की मोटरें पानी में डूब जाती हैं।
बारिश में दो से तीन बार पानी सप्लाई केवल मोटरों के पानी में डूब जाने के कारण प्रभावित होती है। अब नगरपालिका ने इस पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है। पुराने इंटेकवेल के बाजू में जमीन से 25 फीट ऊंचा नया इंटेकवेल बनाकर इसमें ऊंचाई पर मोटरों को लगाया जा रहा है।
जंजीरों की मदद से गोंडवाना कंस्ट्रक्शन कंपनी नागपुर के ठेकेदार इन मोटरों को लगा रहे हैं। 50 फीट गहरे इस इंटेकवेल में मोटरों को लगाने के लिए मशक्कत शुरू हो गई है। काफी मुश्किलों से इन मोटरों को ऊंचाई पर फिट किया गया है। अब ये मोटरें पानी में नहीं डूबेगी। यदि इन मोटरों के लेवल तक पानी आता भी है तो 24 घंटे में 432 लाख लीटर पानी पंप करने की क्षमता के कारण ये मोटरें एनीकट में पानी का लेवल 1 घंटे में ही कम कर देंगी।
फैक्ट फाइल :-
हर मिनट में 10 हजार लीटर पानी फेंकेगी : नई व्यवस्था में नए इंटेकवेल में लगाई गई एक मोटर 10 हजार लीटर पानी एक मिनट में पंप कर सकती है। 6 लाख लीटर पानी एक घंटे में ये मोटर पंप कर देंगी। तीनों मोटरें एक साथ चलने पर 18 लाख लीटर पानी एक घंटे में पंप होगा।
शहर में इस वर्तमान में 9 हजार 955 नल कनेक्शनधारी हैं। इनमें से अधिकांश को फिल्टर प्लांट से ही पेयजल सप्लाई होता है। ऐसे में एक बड़े तबके को 24 घंटे पानी सप्लाई देने नए इंटेकवेल में मोटरें ऊंचाई पर लगाई गई हैं। ऐसे में पुराने इंटेकवेल की मोटरों के पानी में डूब जाने के बावजूद नए इंटेकवेल से पेयजल सप्लाई चालू रहेगी।
मोटर सुधरवाने में एक से डेढ़ लाख खर्च होते : 2014की बारिश में भी मोटरें पानी में डूब गई थीं। रात में मोटरें डूबीं, सुबह जलप्रदाय अमले के कर्मचारियों ने इन्हें बाहर निकाला। इसके बाद जलप्रदाय अमले के कर्मचारियों ने इन्हें खोलकर सुखाया था। पेयजल सप्लाई प्रभावित हो गई थी। इन्हें ठीक करवाने में एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए थे। 2013 की बारिश में दो बार मोटरें डूबी थीं। दो मोटरों की क्वाइल जल गई थी। आधे शहर में पानी सप्लाई प्रभावित हुई थी।
200केवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर भी आया : मोटरों को चलाने के लिए 200 केवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर बुलवाया जा चुका है। नपा नया कनेक्शन बिजली कंपनी से ले रही है। इसके बाद इस ट्रांसफार्मर से ही ये मोटरें चलाई जाएंगी।
2 टन वजन की एक मोटर : नए इंटेकवेल पर लगाई गई एक-एक मोटर 2 टन वजन की है। एक मोटर 240 एचपी की है। बेहद भारी होने के कारण इन्हें ऊंचाई जैसे-तैसे यह काम कर दिया गया है। अब इन मोटरों की फिटिंग करवाई जा रही है।
5 फीट ऊपर लगाई मोटरें : वर्तमान में पुराने इंटेकवेल की मोटरें पानी के लेवल से केवल पांच फीट की ऊंचाई पर लगी हैं। यहां चार मोटरें लगी हुई हैं। जो कि फिल्टर प्लांट तक पानी पहुंचाती हैं। जरा सा जलस्तर बढ़ते ही ये मोटरें पानी में डूब जाती हैं।
- 25 फीट ऊंचाई पर लगाई गई मोटर
240 एचपी क्षमता की हैं तीन मोटरें
- 200 केवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर भी आया
- 18 लाख लीटर पानी एक घंटे में पंप कर सकती हैं मोटरें
- 50 फीट गहरा और 25 फीट ऊंचा है नया इंटेकवेल