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मैं पढ़ना चाहता हूं, मवेशी चराना नहीं: सुखदेव
मैंपढ़ना चाहता हूं, मवेशी नहीं चराना चाहता...। स्कूल में पढ़ने के इन ललक भरे शब्दों को अपनी जुबान पर लिए एक स्कूली छात्र बुधवार को बस में बैठकर गांव से बैतूल एसपी ऑफिस पहुंचा। वह नहीं जानता था कि उसे कहीं ठिकाना मिलेगा या फिर नहीं, लेकिन पढ़ाई के लिए उसने अपना घर तक छोड़ दिया।
दरअसल, कक्षा 6वीं का छात्र सुखदेव तेड़गाम चूरनी गांव के मिडिल स्कूल में पढ़ता है। उसके परिवार में 1 बहन और उससे बड़ा भाई और पिता शंकर और माता है। पिता-माता खेती करते हैं। उसके घर में तीन बैल और एक बकरी है। उसके दोनों बहन भाई पढ़ते हैं, लेकिन उसके पिता शंकर उसे स्कूल जाने की बजाए मवेशी चराने का बोलते हैं। इससे वह स्कूल नहीं जा पता। इससे वह गांव से बस में बैठकर बैतूल गया। एसपी ऑफिस के सामने बैठे सुखदेव ने बताया कि उसे गांव के स्कूल के मासाब ने एक बार बताया था, कि बैतूल में छात्रावास में रहकर वह पढ़ाई कर सकता है। इसलिए वह घर में बिना किसी को बताए पढ़ाई के लिए बैतूल गया। स्कूल ड्रेस में बैतूल आया सुखदेव देर तक एसपी ऑफिस के पास रहा। इस दौरान एक व्यक्ति ने बैतूल बीआरसी में इसकी सूचना दी। फिर सीएसी बच्चे को लेने एसपी ऑफिस आए और अपने साथ निशक्त बालिका आश्रम ले गए। उन्होंने बच्चे को समझाया कि वह पढ़ाई करेगा। शासन स्तर से उसकी मदद की जाएगी, उससे कोई मवेशी चराने का नहीं बोलेगा।
ये अच्छा हुआ, कि बच्चा गांव से बस में सवार होकर बैतूल एसपी ऑफिस गया। इससे वह वापस अपने घर पहुंच जाएगा, लेकिन अगर बच्चा भटक जाता और गलत हाथों में पहुंच सकता था।
काउंसलिंगकी जाएगी
^बच्चेको घर तक छोड़ने के लिए रवाना कर दिया गया है। बच्चे के पालकों को समझाइश दी जाएगी, कि बच्चे को पढ़ाई करने दें, उसे मवेशी चराने में लगाए। बच्चे को बैतूल भेजने वालों की जांच की जाएगी और दोषी पर कार्रवाई होगी।^ एसआरझरबड़े, बीआरसीबैतूल
सुखदेव तेड़गाम