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सांभर की मौत, पोस्टमार्टम के बाद धाराखोह में अंतिम संस्कार किया
इन कारणों से हुई सांभर की मौत
{सुबह 8 बजे वन अमला घर में बंद सांभर के पास पहुंच गया था। लेकिन उसी समय सांभर को बाहर नहीं निकाला जा सका।
{सुबह 11.18 पर होशंगाबाद से वेटनरी डॉक्टर शर्मा को बुलाया गया था। वे समय पर नहीं आए। नहीं तो सांभर को इलाज मिल जाता।
{शॉक और हड़बड़ाहट के कारण सांभर की जान चली जाए इसीलिए नियमानुसार सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों और टीम के आने की राह देखी गई। 3 बजे यह टीम आई।
{3 बजे टीम के पहुंचने के बावजूद, इस टीम के पांच में से किसी भी सदस्य ने सांभर के पास जाकर उसे सदमे से बचाने के लिए ट्रीटमेंट नहीं दिया।
{सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से डॉ. गुरुदत्त शर्मा समेत अन्य एक्सपर्ट आए थे। सांभर को बेहोश करके आसानी से ले जाया जा सकता था। लेकिन उसे रस्सियों से खींचकर जाल में बांधकर ले जाया गया।
नगर संवाददाता|बैतूल
रामनगरके एक मकान से बुधवार को 9 घंटे की मशक्कत के बाद पकड़े गए सांभर की बुधवार रात धाराखोह के जंगल में ही मौत हो गई। सांभर का पोस्टमार्टम करवाकर गुरुवार को सुबह उसका अंतिम संस्कार किया गया। बुधवार सुबह 8 बजे 3 साल का एक नर सांभर रामनगर के एक घर में घुस गया था। नियमों में बंधा स्थानीय वन अमला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों और कर्मचारियों की टीम के आने की राह देखता रहा, लेकिन टीम 3 बजे आई। इसके बाद 5 बजे सांभर को जाल डालकर निकाला गया। शाम के समय उसे धाराखोह के जंगलों में ले जाया गया। यहां पर कुछ देर तक वह जीवित रहा, लेकिन उसने शरीर में बहुत कम मूवमेंट हो रहा था। देर शाम उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम वापस लौट गई, वहीं स्थानीय वन अमला वहीं रुका रहा। वाहन से नीचे उतारने के बाद वन अमला उसकी मॉनीटरिंग करता रहा। सांभर ने मूवमेंट करना बंद कर दिया था। एसडीओ बीआर गव्हाड़े ने बताया कि सांभर की मौत के बाद पोस्टमार्टम करवाकर धाराखोह के जंगलों में अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
कार्डियकअरेस्ट के कारण हुई थी मौत
सांभरका पोस्टमार्टम पशु चिकित्सा विभाग के डॉ. हरज्ञान सिंह पक्षवार और डॉ. आरके मेश्राम ने किया था। डॉ. आरके मेश्राम ने बताया कि सांभर की मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट था। हार्ट अटैक होने के कारण उसकी मौत हुई थी।