पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • स्क्रीन पर दिखेगी पानी सप्लाई, रूकावट भी आएगी नजर

स्क्रीन पर दिखेगी पानी सप्लाई, रूकावट भी आएगी नजर

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पीएचईने ताप्ती नदी के पानी से 35 गांवों में पेयजल सप्लाई की डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का काम पुणे की यूनिटी इंफ्राटेक कंपनी को सौंपा था। तीन महीने तक ताप्ती नदी और गांवों का उपकरणों की मदद से सर्वे करने के बाद कंपनी ने इसकी डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर पीएचई को सौंपी है। इस रिपोर्ट में कंपनी ने ताप्ती नदी से प्रतिदिन 50 लाख लीटर पानी मिलने का केलकुलेशन लगाते हुए दो नए गांवों को भी इसमें शामिल किया है। जिले में पहली बार पानी सप्लाई की मॉनीटरिंग स्काडा सिस्टम से करने का प्रावधान रखा है। यदि यह सिस्टम लागू होता है तो पेयजल की स्थिति बोरीकास गांव के कंट्रोल रूम में एक स्क्रीन पर दिखेगी। स्क्रीन पर देखकर 37 गांवों की पेयजल सप्लाई सुधारी जा सकेगी।

पीएचई ने ताप्ती नदी के पानी से जलसंकटग्रस्त गांवों में पेयजल सप्लाई की योजना बनाई थी। इस योजना के तहत सितंबर में पुणे की यूनिटी इंफ्राटेक कंपनी को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ताप्ती से मिलने वाले पानी का केलकुलेशन करके पानी बर्बाद किए बिना गांवों तक पहुंचाने की व्यवस्था करते हुए यह रिपोर्ट बनाई जानी थी। हाल ही में कंपनी ने पीएचई को रिपोर्ट सौंप दी है। इस डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में कंपनी ने ताप्ती से प्रतिदिन 50 लाख लीटर पानी मिलने का केलकुलेशन किया है। स्काडा सिस्टम यानी सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा इक्वीजीशन सिस्टम से पानी की सप्लाई की मॉनीटरिंग करने की प्लानिंग की है।

यह है स्काडा सिस्टम

{स्काडा सिस्टम में पेयजल सप्लाई के वाल्व, पाइप लाइनों, मोटरों पर सेंसर लगेंगे।

{सभी सेंसरों का कंट्रोल बोरीकास फिल्टर प्लांट के कंट्रोल रूम से रहेगा।

{ स्क्रीन पर जलने वाले लाइट्स को देखकर सेंसर से जुड़े वाल्व, पाइप लाइन और मोटर की वर्किंग की स्थिति देखी जा सकेगी।

{ग्रीन लाइट जलने पर उपकरण चालू होने और रेड लाइट जलने पर उपकरण बंद का संकेत मिलेगा।

{कम कर्मचारी बहुत कम परिश्रम और समय खर्च करके पेयजल सप्लाई को कंट्रोल कर सकेंगे। रुकावटें भी तुरंत पकड़कर दूर की जा सकेंगी।

{यह सिस्टम महाराष्ट्र और गुजरात की एडवांस पेयजल सप्लाई परियोजनाओं में उपयोग होता है। मप्र की किसी भी पेयजल परियोजना में इसका उपयोग नहीं हुआ है।

राज्य शासन से स्वीकृत करवाएंगे

^जनभागीदारीसे प्राप्त राशि के आधार पर प्रोजेक्ट बनाया है। इसकी डीपीआ