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वसतिगृह का होगा डिस्मेंटल, एक करोड़ से बनेगा वर्किंग वूमन हॉस्टल
{1 करोड़ 4 लाख की लागत से होगा निर्माण
{वर्ष 2004 से खाली पड़ा है वसतिगृह भवन
िसटीरिपोर्टर|बैतूल
ग्रामीणअंचलों से नौकरी के लिए रोजाना शहर आने वाली महिलाओं के लिए शहर में ही वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाया जाएगा। इस हॉस्टल में कामकाजी महिलाओं के साथ कॉलेज छात्राएं भी रह सकेंगी। 10 सालों से खाली पड़े महिला वसतिगृह के भवन को डिस्मेंटल करके इसी जगह पर यह हॉस्टल बनाया जाएगा। इसके लिए तैयारियां शुरू की जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय पर 47 शासकीय कार्यालय हैं। इनमें 1200 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं। अधिकांश महिलाएं ग्रामीण अंचलों से रोजाना शहर तक आना-जाना करती हैं। अधिकांश महिलाएं किराए के मकानों में रह रही हैं। ऐसे में इन महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब महिला सशक्तीकरण विभाग ने सिविल लाइन में महिला वसति गृह का डिस्मेंटल करके इसकी जगह वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाने की योजना बनाई है। खतरनाक घोषित होने के बाद 2004 से यह भवन खाली पड़ा है। इस भवन का डिस्मेंटल नहीं होने के कारण यह जमीन अटकी हुई है।
एक करोड़ 4 लाख की लागत से बनेगा हॉस्टल
वर्किंगवूमन हॉस्टल का निर्माण एक करोड़ 4 लाख की लागत से किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी पीआईयू इस भवन का निर्माण करेगी। हालांकि पहले पुराने महिला वसतिगृह का डिस्मेंटल करना होगा। इसके बाद खाली जमीन के फोटोग्राफ के साथ प्रपोजल बनाकर भेजा जाएगा। इसके लिए तैयारियां की जा रही है।
स्टोर के रूप में इस्तेमाल हो रहा भवन
वसतिगृहभवन के डिस्मेंटल की प्लानिंग भी कई बार हो चुकी है, लेकिन डिस्मेंटल नहीं किया गया। वर्तमान में इस भवन को महिला बाल विकास विभाग के स्टोर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। खिलौने, पोषक आहार समेत अन्य सामान यहां रखा जाता है। जगह-जगह से इसमें दरारें गई हैं, पानी भी टपकता रहता है। छत के टुकड़े भी गिरते रहते हैं।
बैतूल| सिविल लाइन स्थित वसतिगृह को तोड़कर वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाया जाएगा।
फैक्ट फाइल
1200 महिलाएं काम करती हैं सरकारी विभागों में
50 सीटर रहेगा वर्किंग वूमन हॉस्टल
15 सीट ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए रिजर्व रहेंगी
1.4 करोड़ की लागत से बनाएंगे हॉस्टल
47 सरकारी कार्यालय हैं शहरी क्षेत्र में
खाली पड़े भवन को डिस्मेंटल किया जाएगा
^महिलावसतिगृह का जर्जर भवन खाली पड़ा हुआ है। इस भवन का डिस्मेंटल किया जाएगा। इसकी जमीन के समतलीकरण के बाद, इसी पर पर वर्किंग वूमन हॉस्टल बनाया जाएगा। जिससे नौकरीपेशा महिलाओं को रहने की सुविधा मिलेगी -अभिजीत पचौरी, जिला महिला सशक्तीकरण अधिकारी
25 सालों से वर्किंग हॉस्टल से वंचित महिलाएं
प्रदेशके अन्य जिलों में वर्किंग वूमन हॉस्टलों का फायदा महिलाओं को मिल रहा है। शहर में 25 सालों से प्लानिंग तो बहुत बनी, लेकिन महिलाओं को हॉस्टल नहीं मिल पाया। 1988-89 में सिविल लाइन में नजूल की जमीन पर 16 लाख की लागत से महिला वसतिगृह के निर्माण की योजना बनाई गई थी। नगरपालिका के सुस्त चाल से हुए निर्माण कार्य के कारण 1996 में यह बनकर तैयार हुआ। बनने के बाद ही इससे पानी टपकने लगा, जैसे-तैसे कुछ साल महिलाएं इसमें रहीं, लेकिन 2004 में पीडब्ल्यूडी ने इसे खतरनाक घोषित कर दिया, तब से यह खाली है।