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स्वाइन फ्लू की दवा कम है तो तुरंत बुलाएं

6 वर्ष पहले
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कलेक्टरज्ञानेश्वर बी पाटिल गुरुवार की दोपहर दो बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था देखी। ड्यूटी डॉक्टर्स आर वर्मा से मरीजों की एंट्री पूछी और उनको दिए जाने वाले ट्रीटमेंट के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि फेज वन के तहत पेपर-पेन लैस कार्य शुरू किया जाना है। सिस्टम अपडेट होने पर इस पर काम होगा। इसके बाद सिविल सर्जन कक्ष में श्री पाटिल ने डॉक्टर्स की स्वाइन फ्लू को लेकर बैठक ली। इसमें अस्पताल के समस्त डॉक्टर्स मौजूद थे।

कलेक्टर ने स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज को दी जाने वाली टेमीफ्लू दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दवा कम है, तो इससे तुरंत बुलाया जाए। अस्पताल में 24 घंटे दवा मिल सके, ऐसी व्यवस्था हो। स्वाइन फ्लू के लक्षण और बचाव की जानकारी का प्रचार, प्रसार किया जाएगा। स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ एएनएम को ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर सर्दी-खांसी के मरीजों को चिह्नित करें। उनके लक्षणों के बारे में पूछे और उपचार दें। कोई स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीज मिलता है, तो उसे बैतूल भेजें और उसकी जांच कराएं। संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए सैंपल जबलपुर लैब भेजे जाएं। जनता और स्कूली बच्चों को रूमाल रखने की हिदायत दी जाए और मुंह पर रूमाल रखकर छींके और खांसे। अधिक से अधिक समय साबुन से हाथ धोएं।

अब तक तीन संदिग्ध

बैतूलमें वैसे तो अब तक स्पष्ट तौर पर कोई संदिग्ध नहीं मिला है। सभी बाहरी कांटेक्ट में आने से स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मिले हैं। नागपुर के निजी अस्पताल में बैतूल की एक महिला को स्वाइन फ्लू पॉजीटिव बताए जाने पर उनका ट्रीटमेंट नागपुर में चला है। दूसरा आमला की एक महिला का रायपुर में पॉजीटिव बताए जाने पर उनका वहां इलाज जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने उनके परिजनों को आब्जरवेशन में रखा है। जबकि बैतूल की एक युवती जयपुर से स्वाइन फ्लू पॉजीटिव की आई थी। उसे टेमीफ्लू दवा दी गई है।

स्वाइन फ्लू से घबराए नहीं, सतर्कता बरतें

सीएमएचओडॉ. एसएस वास्कले ने बताया कि स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी हुई बीमारी है, जो टाइप के इनफ्लूएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच-1, एन-1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। जब आप खांसते या छींकते हैं, तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन दरवाजा, फोन, की-बोर्ड, रिमोट कंट्रोल और मोबाइल फोन के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं। यदि किसी संक्रमित व्यक्ति ने इन चीजों का इस्तेमाल किया हो।