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खाद की कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई करो: कलेक्टर
18 हजार 121 मीट्रिक टन की जरूरत, जिले में यूरिया खत्म
जिलेभरमें रबी फसलों की बोवनी अंतिम चरण में पहुंच गई है। दो रैकों से जितना यूरिया आया था, किसानों को बंटने के बाद अब भंडारण की स्थिति निल हो गई है। किसानों के मुताबिक यदि समय पर उन्हें यूरिया नहीं मिलता है, तो फसल की ग्रोथ रुक जाएगी, कई क्षेत्रों में फसल पीली पड़ने लगी है। एक सप्ताह में यदि फसलों को खाद नहीं मिला, तो फसलों पर संकट के बादल छा जाएंगे। इधर कृषि विभाग जल्द यूरिया की रैक आने की बात कह रहा है। जितना लक्ष्य रबी फसलों का वह भी लगभग पूरा होने को है, लेकिन खाद नहीं मिलने से किसान परेशान हो गए हैं। इधर कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार तीन दिन में यानी गुरुवार तक खाद की रैक आने की उम्मीद है।
जिले में अब तक दो रैकों से जितना यूरिया आया था। उसे किसानों को बांटा गया है। लेकिन जरूरत से कम यूरिया मिलने के कारण किसान अब यूरिया के लिए सोसायटी और एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। कृषक रवि सरनेकर, रामेश्वर भगत ने बताया कि समय पर यूरिया नहीं मिला तो फसल की ग्रोथ रुक जाएगी।
इसलिए जरूरी है यूरिया खाद
फसलबुवाई के 15 दिन बाद फसलों की ग्रोथ के लिए यूरिया का छिड़काव किया जाता है। इसके अलावा किस्म के हिसाब से भी यूरिया का छिड़काव किया जाता है। एक फिट का पौधा होने पर एक माह बाद फिर यूरिया का छिड़काव किया जाता है। इस तरह दो पानी की सिंचाई पर यूरिया की जरूरत पड़ती है। गेहूं की किसी किस्म में चार पानी भी दिया जाता है, लेकिन यूरिया दो से तीन बार ही डाला जाता है। चूंकि लक्ष्य के अनुसार खेतों में बोवनी हो चुकी है, इस लिहाज से यूरिया की जरूरत किसानों को तुरंत है।
30 हजार मीट्रिक टन की डिमांड, आया 11879
जिलेके 10 ब्लाॅकों में किसानों को वितरण के लिए 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन इसके एवज में अब तक 11 हजार 879 हजार मीट्रिक टन ही यूरिया आया है। यानी 18 हजार 121 मीट्रिक टन की जरूरत जिले के दसों ब्लाकों को है।
डिमांड भेजी है
^यूरिया की कमी तो जिले में बनी हुई है, हालांकि दूसरे जिलों से हालात बेहतर हैं। फिलहाल यूरिया की डिमांड भेजी गई, कब तक आएगी इसकी जानकारी नहीं है। पीएसकिरार, डीडीओकृषि विभाग
आंकड़े कृषि विभाग के अनुसार- हेक्टेयर में
आंकड़े कृषि विभाग के मुताबिक, मीट्रिक टन में
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