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मिर्च की धांस से घरों में कैद रहते हैं लोग

7 वर्ष पहले
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हाथ जोड़कर किया निवेदन, मिर्च दुकानें हटवाएं

समाजसेवीसमर्थ तिवारी, अनीता दुबे, अंजली चेराल, दीप्ति दुबे, पार्वती बाई कुंभारे ने रविवार को मिर्च व्यापारियों के पास पहुंचकर निवेदन किया कि वे अपनी दुकानें किसी अन्य जगह लगाएं। दीप्ति दुबे ने बताया कि मिर्च के ट्रक आने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इतनी खांसी चलती है कि कई बार उल्टियां तक हो जाती हैं। उनके निवेदन पर मिर्च व्यापारी राजकुमार चौरसिया ने बताया कि नपा यदि किसी अन्य जगह जमीन दे दे तो वहां दुकान लगा लेंगे।

बैतूल| मिर्ची बाजार में रविवार को पार्षद ममता भटट के साथ महिलाएं मिर्ची व्यापारी से हाथ जोड़कर निवेदन करती हुई।

20 लाख सालाना कमाई, व्यवस्था नहीं

नपाबाजार में बैठने वाले दुकानदारों से शुल्क लेती है। नपा को शहर के सभी साप्ताहिक बाजारों से 20 लाख रुपए सालाना की कमाई होती है। लेकिन व्यापारियों को रहवासी क्षेत्र में बाजार लगाना पड़ता है। कृष्ण मंदिर कोठी बाजार और गुड़ बाजार में तो पैदल चलने तक की जगह नहीं रहती।

50 दुकानदार मिर्च के व्यापारी

शहरमें अधिकांश लाल मिर्च नागपुर से आती है। हरी और लाल मिर्च की जिले में खपत है। प्रतिदिन 5 क्विंटल मिर्च की खपत होती है।

नगर संवाददाता|बैतूल

लालमिर्च की धांस के डर से शहर 500 परिवार खुद को घरों में कैद कर लेते हैं। बचाव के लाख इंतजाम करने के बावजूद इन लोगों को एलर्जी ने चपेट में ले लिया है, दमे के पीडि़त भी इस क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। अिधकािरयों से शिकायत के बावजूद इस रहवासी क्षेत्र से मिर्च बाजार शिफ्ट नहीं किया गया। रविवार को एक बार फिर जब मासूम बच्चों और महिलाओं को परेशानी हुई, तो उन्होंने मिर्च की दुकानों पर जाकर दुकानें हटाने के लिए हाथ जोड़कर गुहार लगाई। कोठी बाजार में साप्ताहिक बाजार लगता है। इन दिनों में कोठी बाजार के दुर्गा मंदिर से सटे हुए इतवारी बाजार क्षेत्र के रहवासी बंद कमरों में कैद रहते हैं। दरअसल मिर्च के ढेर से उठने वाली धांस से खुद को बचाने के लिए वे ऐसा करते हैं।



रविवार को दरवाजे बंद करने के बावजूद कुछ बच्चों को जब बहुत ज्यादा परेशानियां हुईं, तो क्षेत्र की महिलाएं मिर्च दुकानदारों के पास दुकानें हटाने की गुहार लगाने जा पहुंची। हाथ जोड़कर महिलाओं ने कहा कि भैया, दुकानें न्यू बैतूल ग्राउंड या उसके पास के क्षेत्र में ल