दिल कहे रुक जा रे यहीं पे कहीं...
नर्मदापुरम संभाग प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है और इसके साथ ही यहां नर्मदा के विभिन्न घाटों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व इसे पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाता है। इसके अलावा भी यहां कई ऐसे स्थान हैं जो पर्यटकों को लुभाने के लिए अपनी अलग प्रासंगिकता रखते हैं। वैसे जो भी पर्यटक एक बार बैतूल के पर्यटन स्थलों पर आता है तो वह यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और आतिथ्य भावना से अभिभूत हो जाता है। यदि इन पर्यटन स्थलों की सही मार्केटिंग की जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन उद्योग के लिए अपार संभावना लिए हुए है। आवागमन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र बेहद अनुकूल है। जहां यह नेशनल हाईवे 69 पर स्थित है तो रेल मार्ग में दिल्ली-चेन्नई मार्ग से जुड़ा हुआ है। साथ ही रेलवे की दृष्टि से इटारसी एक जंक्शन है जो देश की चारों दिशाओं से जुड़ा हुआ है।
नर्मदापुरम ऐतिहासिक और पौराणिक दोनों ही लिहाज से अतीत को समेटे हुए है। यहां के ऐतिहासिक किले और पुरातत्व महत्व की कई इमारतें शामिल है। इसके अलावा मां नर्मदा और तवा का संगम स्थल होने के साथ-साथ नर्मदा के किनारे प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ा देती है। अमावस्या और पूर्णिमा पर हजारों की तादाद में मां नर्मदा की आराधना करने विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बालाजीपुरम
बैतूल जिले की पहचान में बालाजीपुरम एक नया सिंबाल बन गया है। जिसकी लोकप्रियता देश दुनिया में पांचवे धाम के रूप में है। नेशनल हाईवे 69 पर स्थित इस स्थान पर रुक्मणि बालाजी का विशाल मंदिर है। इसके अलावा यहां पर एक विशाल क्षेत्र में चित्रकूट बनाया गया है। यहां पर कृत्रिम रूप से मंदाकिनी नदी निर्मित की गई है। इसके अलावा वैष्णो धाम सहित विभिन्न तरह के देवी-देवताओं के अलग-अलग मंदिर बने हुए हैं। यहां पर प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद मे दर्शनार्थी पहुंचते हैं। साथ ही यहां पर ज्योतिर्लिंग की भी स्थापना की गई है।
मुक्तागिरी
भैंसदेही तहसील में स्थित यह एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर जैन तीर्थस्थल है। जहां हजारों की तादाद में लोग हर साल पहुंचते हैं। बताया गया कि यहां पर शरद पूर्णिमा के दिन केसर की बारिश होती है। चारों तरफ हरी-भरी पहाडिय़ों के बीच संगमरमर से बने मंदिर बेहद खूबसूरत नजर आते हैं। यहां पर प्राकृतिक झरने भी हैं। कई महान जैन मुनि यहां अपना चौमासा करने हर वर्ष आते हंै। यहां पर जाने के लिए बैतूल रेलव