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कनेरा सिंचाई प्रोजेक्ट की सुनवाई 29 को, 50 हजार किसानों को आस
{आठ करोड़ रुपए से बढ़कर 1 अरब 25 करोड़ की हुई योजना।
अरविंदशर्मा | भिंड
कनेराउद्वहनसिंचाई योजना की आधारशिला 36 वर्ष पहले रखी गई थी, लेकिन घोटालों अौर घड़ियालों की परछाईं की वजह से योजना का काम अधर में लटक गया है। जलसंसाधन विभाग के अफसरों ने योजना का काम चालू करने को लेकर दिल्ली सुप्रीमकोर्ट में वर्ष 2013 में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई अब 29 सितंबर को होगी। अफसरों का कहना है कि अगर योजना का काम चालू हो जाता है, तो 96 गांव की 10 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
कनेरा उद्वहन सिंचाई योजना की आधारशिला सन 1978 में रखी गई थी। तब इस योजना पर 8 करोड़ रुपए का बजट खर्च होना था। इस योजना का उद्घघाटन तीन बार हुआ, लेकिन चंबल सेंक्चुरी की वजह से बीच में ही काम रोक दिया गया। साल 2008 से इस योजना को लेकर कोई काम नहीं हुआ। वन विभाग के अफसरों ने मौके पर जाकर काम रुकवाया। साथ ही दिशा निर्देश दिए थे कि अगर कनेरा उ्दवहन सिंचाई योजना चालू होती है, तो घड़ियालों के जीवन को संकट है।
अफसरबोले हरी झंडी मिली तो 96 गांव को मिलेगा पानी : जलसंसाधनविभाग के अफसरों का कहना है कि चंबल सेंक्चुरी ने कनेरा उद्वहन सिंचाई परियोजना का काम घड़ियालों की वजह से रोक दिया था, जिसकी वजह से वह सुप्रीमकोर्ट में गए थे। उनका मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट कनेरा उद्वहन सिंचाई परियोजना को हरी झंडी दे देता है, तो 50 हजार से अधिक किसानों की जमीन सिंचित होगी। 96 गांव में कभी सूखा नहीं पड़ेगा।
कनेरा उद्वहन सिंचाई परियोजना का शिलान्यास पहली बार 1978 में किया गया, उसके बाद कांग्रेस के नेता सत्यदेव कटारे ने भी योजना पर अपनी शिलापट्टिका लगवाई। अफसरों का कहना है कि तीन बार नेता इस योजना को श्रेय लेने की होड़ में शिलान्यास कर चुके हैं, लेकिन उसके बाद वह योजना को पूरी तरह से भूल चुके हैं।
29 सितंबर को होनी है सुनवाई
^कनेराउद्वहन सिंचाई योजना का काम चंबल सेंक्चुरी की वजह से बंद कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2013 में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई 29 सितंबर को होनी है। अगर फैसला पक्ष में आता है, तो काम शुरू हो जाएगा। आरपीझा, कार्यपालनयंत्री जलसंसाधन विभाग
मैनेजर का हो चुका है अपहरण
कनेरा उद्वहन सिंचाई परियोजना पर वर्ष 2008 में पंडित गिरोह ने मैनेजर का अपहरण कर लिया था। तत्कालीन चंबल आईजी एस के झा तीन दि