‘महिला ही हमारे समाज की रीड की हड्डी’
‘महिला ही हमारे समाज की रीड की हड्डी’
भिंड | बेटियांहमारे समाज के लिए बोझ नहीं हैं। अमेरिका की कल्पना चावला अंतरिक्ष में गई। महारानी लक्ष्मीबाई ने 1857 में आजादी के लिए बिगुल बजाया। देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने पिता की इकलौती संतान थी। विश्व में इनका नाम इतिहास के तौर पर देखा जाता है। बच्चे की पहली गुरु मां होती है। महिला हमारे समाज की रीड की हड्डी है, क्योंकि समाज का निर्माण करती है। बेटी के जन्म होने पर उसका स्वागत होना चाहिए। श्रीमती भागवंती बाई शिक्षा प्रचार समिति भिंड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अथिति की आसंदी से प्राचार्य बीके त्रिपाठी ने कही।