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नवजात को टैग बांधा होता तो नहीं आती बच्चा बदलने की नौबत
परिजन ने अस्पताल में किया हंगामा।
भास्करसंवाददाता|भिंड/गोहद
गोहदकेसिविल अस्पताल में बच्चा बदलने को लेकर हुए विवाद ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उजागर कर दी। यदि स्टाफ नर्स ने नवजात को टैग बांधा होता तो ऐसी नौबत नहीं आती। हालांकि अब बेटी का फैसला डीएनए टेस्ट से होगा। मालूम हो, कि गोहद अस्पताल में गुरुवार की रात दो प्रसूताओं ने बच्चों को जन्म दिया। इसमें एक ने बेटा और एक ने बेटी को जन्म दिया था। दोनों को ठंड की वजह से एसएनसीयू के बेबी बार्मर में रखा था। जिस महिला ने बेटे को जन्म दिया था, उसकी सास ने बेटा चुराने का दूसरे पक्ष पर आरोप लगाया। इसके बाद मामला बिगड़ा और पुलिस को बुलाना पड़ा।
सिविल अस्पताल गोहद में गुरुवार की रात प्रसूता भगवती प|ी राजू शर्मा (30) निवासी बिरखड़ी ने बच्ची को जन्म दिया। उधर दूसरी प्रसूता वर्षा प|ी राजेन्द्र कुशवाह (26) निवासी गल्लामंडी गोहद ने पांच मिनिट बाद ही लड़के को जन्म दिया था। स्टाफ नर्स ने दोनों बच्चों को एसएनसीयू में इलाज के लिए एडमिट कर दिया, लेकिन कुछ देर बाद ही भगवती की सास ललिता देवी लड़की की जगह लड़के को बदलकर ले गई। वहीं दूसरी ओर वर्षा की सास गिरजा बिना देखे ही लड़के की जगह लड़की को ले आई। सुबह वर्षा ने देखा कि उसने बेटे को जन्म दिया है, लेकिन बैड पर सुबह लड़की थी। इसके बाद उसने स्टाफ नर्स को बुलाकर कहा कि उसका लड़का कहा है। स्टाफ नर्स जब दूसरे वार्ड में भगवती से लड़का लेने गई, तो उसकी सास ललिता ने लड़का देने से इनकार कर दिया। उसके बाद शुक्रवार की सुबह 9 बजे हंगामा शुरू हो गया।
डॉक्टर ने कहा मेरी ड्यूटी नहीं फिर भी मेरा नाम रजिस्टर पर
सामुदायिकस्वास्थ्य केन्द्र गोहद में गुरुवार की रात की ड्यूटी जेआर शाक्य की नहीं थी, लेकिन ड्यूटी रजिस्टर में उनका नाम लिखा था, इस बात पर जेआर शाक्य भड़क गए, उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।
गोहद के अस्पताल के बाहर लगी दोनोें ही बच्चों के परिजन की भीड़।