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10 व 50 के स्टांप नहीं, लोग परेशान

5 वर्ष पहले
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ई-स्टांप की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही शहर में छोटे स्टांप की कमी आ गई है। लोगों को न तो तहसील में स्टांप मिल रहे हैं और न ही वेंडर के पास उपलब्ध हैं। यही हाल पोस्टल आर्डर के भी हैं। डाकघर में पोस्टल आर्डर का हर समय टोटा बना रहता है। ऐसे में लोगों को शपथ पत्र समेत अन्य जरूरी काम के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

रोज लोग स्टांप लेने तहसील कार्यालय आ रहे हैं। यहां आने के बाद उन्हें पता चलता है कि स्टांप नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। आमतौर पर लोग सूचना का अधिकार के तहत जानकारी लेने के लिए 10 रुपए के स्टांप का प्रयोग करते हैं। स्टांप के अभाव में वह अपना आवेदन संबंधित कार्यालय में नहीं लगा पा रहे हैं। यह समस्या ट्रेजरी ऑफिस से स्टांप नहीं मिलने की वजह से स्टांप वेंडर को उठाना पड़ रही है।

ई-स्टांप लेने जाते हैं, तो प्रोवाइडर भी नहीं देते
व्यक्ति को सर्विस प्रोवाइडर के पास जाना पड़ता है, लेकिन यहां भी उनको छोटे स्टांप नहीं मिल पाते हैं। प्रोवाइडर द्वारा उन्हें 50 रुपए से कम के ई-स्टांप नहीं निकलने की जानकारी दी जाती है। वहीं स्टांप निकालने में आने वाली परेशानी से भी अवगत कराया जाता है। जिसे सुनकर संबंधित व्यक्ति को स्टांप से जुड़े काम को टालना पड़ता है। यह लोगों के लिए परेशानी भरा रहता है। हालांकि सरकार ने लोगों को सहूलियत देने के लिए ई स्टांप व्यवस्था की है, लेकिन अब यह योजना प्रदेश के लोगों के लिए परेशानी साबित हो रही है। खास बात यह है कि प्रशासनिक अफसर भी लोगों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

उप पंजीयन कार्यालय में काम करते कर्मचारी।

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