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सिर्फ नाम की तहसील, खसरा-खतौनी के लिए जाना पड़ता है 30 किमी दूर

5 वर्ष पहले
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तहसीलदार बोले-सुविधाओं के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन की ओर भेजेंगे

भास्कर संवाददाता|मौ

मौ उप तहसील को तहसील का दर्जा मिले करीब डेढ़ साल बीत गए हैं। इसके बाद भी न तो यहां स्थायी अिधकारी व कर्मचारी िनयुक्त किए गए हैं और न ही तहसील स्तर की सुविधाएं लोगों को मुहैया कराई जा रही हैं। स्थिति यह है कि सरकारी हरिजन छात्रावास के एक कमरे में तहसील दफ्तर संचालित हो रहा है। जिसमें न तो ट्रेजरी विभाग, आरआई, एसएलआर भी नहीं बैठते हैं। लोगों को तहसील स्तरीय काम के लिए 30 किमी दूर गोहद जाना पड़ रहा है। इससे क्षेत्र के लोग परेशान हैं।

मौ कस्बे में जुलाई 2014 को शासकीय कन्या विद्यालय के सामने एक आयोजन के दौरान राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य ने घोषणा की थी। मौ को तहसील का दर्जा मिल गया है। जिसके बाद इसका बढ़चढ़कर प्रचार-प्रसार भी किया गया था। मौ क्षेत्र में 52 हल्का हैं और 12 पटवारी पदस्थ हैं। जोकि अपने हेडक्वार्टरों पर नहीं रुकते हैं। जिसके कारण ग्रामीणों को आए दिन परेशान होना पड़ता है। लोगों को तहसील संबंधित कार्यों के लिए 30 किमी लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। किसानों को भू-ऋण अधिकार पुस्तिका बनवाने के लिए ट्रेजरी में जमा होने वाले दस रुपए के चालान के लिए गोहद जाना पड़ता है। चालान से कहीं ज्यादा रुपए उसका किराए भाड़े में खर्च हो जाते हैं।

इसके अलावा खाने पीने में भी रुपया बर्बाद होता है। इसी तरह सीमांकन कराने पर चालान ट्रेजरी में जमा करने के लिए हर कृषक को गोहद जाना पड़ता है। परिणामत: कृषक समय पर सीमांकन नहीं करा पाते और सीमांकन, बंटवारे के अभाव में कई जगह अनावश्यक झगड़े भी होते हैं।

तहसील कार्यालय में काम करता कर्मचारी।

उप पंजीयक का दफ्तर भी नहीं हुआ शुरू
तहसील के नाम पर सिर्फ एक कमरे में संचालित दफ्तर में उप पंजीयक कार्यालय शुरू करने की व्यवस्था भी नहीं है। उप पंजीयक के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी क्षेत्र के किसानों होती है। क्योंकि यहां के किसानों को अब हर छोटे-बड़े क्रय विक्रय के अनुवंध करने के लिए 30 किमी दूर स्थित गोहद तहसील आना पड़ता है। इससे समय के साथ-साथ अिधक रुपए खर्च होते हैं।

10 के चालान के लिए करने पड़ रहे 300 रुपए खर्च: स्थानीय रहवासी बहादुर सिंक का कहना है कि मुझे भू-ऋण पुस्तिका के लिए 10 रुपए का चालान बनचाना था। लेकिन स्थानीय स्तर पर तहसील में सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मुझे 300 रुपए तो खर्च करने ही पड़े। इसके अलावा पूरा दिन खराब हो गया। इससे काफी परेशानी हुई। शासन और प्रशासन इस समसया के निराकरण की ओर ध्यान दे तो क्षेत्र के लोगों के भी तहसील की सभी सुविधाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा और क्षेत्र का विकास भी हो सकेगा।

कंप्यूटर से नकल भी नहीं
यहां कंप्यूटर से नकल निकलवाने तक की सुविधा नहीं है। इसके साथ ही नकल पर लगने वाले टििकट ट्रेजरी से मिलते हैं जिन्हें लेने के लिए गोहद या भिंड जाना पड़ता है। आय प्रमाण पत्र, मूल निवासी, डायवर्सन, नजूल की एनओसी के आवेदन देने या मूल प्रति प्राप्त करने पर ट्रेजरी टिकट लगाना आवश्यक होता है।



इन्हें सबसे ज्यादा परेशानी
मौ क्षेत्र के बड़ेरा, सौरा, जमादार, गुमारा सहित दर्जनों गांव से गोहद तहसील कार्यालय 30 से 40 किमी दूर है। इसके साथ ही लोगों को इन जगहों से आवागमन के लिए बेहतर साधन भी नहीं मिलते हैं।



प्रमाण-पत्र भी नहीं बनते
तहसील का दर्जा प्राप्त एक साल से भी ज्यादा का समय हो गया। लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। छोटे से काम के लिए भी गोहद भागना पड़ता है। राजवीर सिहं, स्थानीय निवासी, मांग पर प्रस्ताव भेजा जाएगा

प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं

विभिन्न मदों की शासकीय राशि जमा करने हेतु इधर-उधर जाना पड़ता है जो व्यावहारिक रूप से परेशानी का कारण है। स्थानीय स्तर पर सभी सुविधाएं लोगों को मिलें, इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए शासन की ओर भेजा जाएगा। बीके पाण्डेय, तहसीलदार मौ

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