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बायपास पर डिवाइडर नहीं होने से रोजाना हो रहे हादसे
{बायपास पर होने वाले हादसों में हर महीने दो से तीन लोगों की जा रही जान
{बायपास पर डिवाइडर का निर्माण कराकर हादसों से बचा जा सकता है
भास्करसंवाददाता|भिंड
ग्वालियरसे इटावा के लिए जाने वाले नेशनल हाईवे-92 के शहर से होकर गुजरे बायपास पर हादसे बढ़ते जा रहे हैं। इनके पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला यह कि बायपास के ईद गिर्द आबादी बढ़ गई है और बस्तियां भी बसती जा रही हैं। दूसरा यह कि बायपास पर डिवाइडर नहीं है और हर समय रेत से भरे डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली ट्रक बायपास पर दौड़ते रहते हैं। जिससे रोजाना हादसे हो रहे हैं।
मालूम हो, कि बायपास करीब चार से पांच किलोमीटर लंबा है। इसका निर्माण तीन साल पहले हाईवे बनाने वाली कंपनी ने किया था, लेकिन बायपास पर कहीं भी डिवाइडर नहीं बनाया गया है। ऐसे में हादसों की तादाद में रोज इजाफा हो रहा है। बायपास पर सड़क हादसों से हर महीने दो से तीन लोगों की जान जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सबसे पहले बायपास पर डिवाइडर का निर्माण कराया जाए और फिर भारी वाहनों के लिए दूसरे बायपास का निर्माण करने की योजना बनाई जाए। जिससे रोजाना होने वाले हादसों को रोका जा सके।
बायपास पर नहीं बनाए गए डिवाइडर, जिससे रोजाना हो रहे हैं हादसे।
जांच कराई जाएगी
^बायपास 10 मीटर चौड़ा है। इस चौड़ाई में डिवाइडर नहीं बनाया जा सकता। बायपास पर अधिक एक्सीडेंट हो रहे हैं, तो इसकी जांच कराई जाएगी। आरएसमिश्रा, डीजीएम एमपीआरडीसी
ये हुए हादसे
{करीबदो माह पहले बाइक सवार युवक को डंपर ने कुचल दिया था। युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी।
{करीब एक महीने पहले भारौली तिराहे पर बाइक सवार तीन युवकों को पीछे से रहे वाहन ने टक्कर मार दी थी। जिसमें तीनों गंभीर घायल हुए थे।
{सिंहुड़ा से भिंड के लिए रही एक बस अनियंत्रित होकर बायपास पर एमजेएस कॉलेज के सामने पलट गई थी। जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
{बायपास पर भारौली तिराहे पर अंधा मोड़ है, जहां सामने से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता।
{लहार चुंगी पर कलेक्टोरेट के पास से गाड़ियों का आना-जाना रहता है। सरकारी कार्यालय होने के कारण भीड़ भी अधिक रहती है।
{सर्किट हाउस के पास भी डेंजर स्पॉट है। यहां मोड़ होने के साथ-साथ कुछ आगे चलने पर एमजेएस कॉलेज है। इस वजह से भीड़भाड़ रहती है।
तेजी से बढ़ती जा रही हैं बस्तियां
बायपासपर पिछले तीन साल में रिहायशी क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। पहले यहां एक्का-दुक्का स्कूल और मकान थे। तीन साल पहले एमपीआरडीसी ने इसका निर्माण कराया। बायपास के निर्माण होने के बाद इस क्षेत्र में लगातार निर्माण कार्य हो रहे हैं। अब बायपास शहर का हिस्सा हो गया है। आबादी क्षेत्र के बीच से भारी वाहन निकल रहे हैं, जिससे सड़क पर हादसे हो रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि जनप्रतिनिधि और अफसर नए बायपास निर्माण की योजना बनाएं।