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शहीदों के बेटे भी संभाल रहे देश सेवा का मोर्चा

5 वर्ष पहले
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प्रदेश में सबसे ज्यादा सैनिक हैं भिंड जिले के

रिटायर्ड सैनिकों की संख्या भी है सबसे अधिक

आकाश सिंह भदौरिया|भिंड

बीहड़, बंदूक और रंजिश के लिए कुख्यात जिला भिंड में देश सेवा का जज्बा और जुनून देखने लायक है। युवाओं सेना और पैरामिलिट्री फोर्स का नशा जैसा है। शहीद पिता के सपनों को पूरा करने के लिए भी उनके जांबाज बेटे सरहद पर मोर्चा संभाले हुए हैं।

इनमें कोई अपने घर में इकलौता है, तो किसी ने मां की प्रेरणा से आर्मी ज्वाइन कर पिता की कमी को पूरा किया। जिले से आर्मी, पैरामिलिट्री फोर्सेस में 40 हजार लोग नौकरी कर रहे हैं। भिंड के जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी पंकज कहते हैं कि यहां के युवा काफी जोशीले हैं। इसी वजह से पूरे प्रदेश में सबसे अधिक भूतपूर्व सैनिकों की संख्या भिंड जिले में ही है।

इकलौते बेटे ने भी चुनी देश सेवा की राह
ऑपरेशन पवन में शहीद हो गए थे वीरेंद्र सिंह
भिंड के चतुर्वेदी नगर निवासी वीरेंद्र सिंह 1987 में चलाए गए ऑपरेशन पवन में दुश्मनों से लड़ते हुए श्रीलंका में शहीद हुए थे। इकलौता बेटा संतोष सिंह ने भी पिता की तरह आर्मी में जाने की ठानी तो मां श्रीदेवी ने उसका हौंसला बढ़ाया। संतोष 2006 में सेना में भर्ती हुए और अभी आर्मी की रायबरेली स्थित बटालियन में पिता की दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं।

ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए थे छोटेलाल
छोटेलाल भारतीय सेना के ऑपरेशन रक्षक में दुश्मनों से लड़ते हुए 8 जून 2002 को यह श्रीनगर के पंचगांव में शहीद हो गए थे। प|ी गुड्डी देवी ने तीन बेटे अरुण 10 , राहुल 7 व हरिओम 6 को पढ़ाया। अरुण ने 1 जून 2009 को सेना ज्वाइन की। वह श्रीनगर के तंगधार में पदस्थ हैं। छोटे बेटे राहुल व हरिओम भी आर्मी ज्वाइन करने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

मां ने दिया हौसला, पिता की तरह आर्मी की ज्वाइन
दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हुए थे लांस नायक सुभाषचंद्र यादव: मूलत भिंड के रमा गांव निवासी लांस नायक सुभाषचंद्र यादव वर्ष 1999 के ऑपरेशन रक्षक में दुश्मनों से लोहा लेते हुए 7 जून 2000 को शहीद हुए थे। उनके तीनों बेटे अतुल, राहुल और गजेंद्र बहुत छोटे थे। प|ी सुषमा के कंधों पर बच्चों की जिम्मेदारी थी। उन्होंने बेटों को पढ़ाया। मां से प्रेरणा लेकर पिता के सपनों को पूरा करने के लिए बड़े बेटे अतुल कुमार ने पढ़ाई के साथ-साथ आर्मी की तैयारी शुरू कर दी। उसे सफलता भी मिली। करीब डेढ़ साल पहले अतुल ने आर्मी ज्वाइन कर ली। वह इस समय नासिक में ट्रेनिंग कर रहा है और जल्द ही बॉर्डर पर पहुंचकर पिता की कमी पूरी करेगा।

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