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चंबल सेंक्चुरी में छोड़े घड़ियालों के 15 बच्चे व 10 विलुप्त प्रजाति के कछुए

5 वर्ष पहले
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बॉक्स से निकलते ही नदी में तैरने लगे जलीय जीव
घड़ियालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद, विदेशी पक्षी भी आए नजर

भिंड |
चंबल सेंक्चुरी में इस बार घड़ियालों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। यह उम्मीद जलीय जीवों की गणना कर रही टीम के अधिकारियों ने जताई है। रविवार को टीम भिंड के बरही घाट तक पहुंच गई। वे गणना के इस कार्य को आगामी दो दिन में पूरा कर देंगे, जिसके बाद नदी में मिले जलीय जीवों के आंकड़े सामने आएंगे।

मालूम हो, कि चंबल सेंक्चुरी में हर साल जलीय जीवों की गणना की जाती है। इस बार भी 4 फरवरी को श्योपुर के पाली घाट से रेंजर डॉ. ऋषिकेश शर्मा समेत अन्य टीम ने यह काम शुरू कर दिया। टीम रोज 35 से 40 किमी तक का सफर तय करती हुई रविवार को सुबह भिंड के अटेर घाट पर पहुंची। यहां से शाम को बरही घाट पर टीम पहुंच गई। इस बीच रास्ते में मिलने वाले जलीय जीवों को काउंट किया गया। डॉ. ऋषिकेश शर्मा ने बताया कि इस साल घड़ियाल अधिक नजर आए हैं। साथ ही मुरैना के खुर्द और किसरौली क्षेत्र में इंडियन स्कीमर व कैप्टर्स प्रजाति के पक्षी बड़ी संख्या में नजर आए। गणना कर रही टीम में वैटनरी कॉलेज जबलपुर के डॉ. हिमांशू, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के हरीमोहन मीणा, एशियन वाटर फॉल के तरुण रॉय, जेयू के राजेश गुर्जर व बरही घाट प्रभारी विमल शर्मा मौजूद रहे।

अब घड़ियाल की संख्या हो गई 1161
वर्ष 2015 में किए गए सर्वे के मुताबिक चंबल सेंचुरी में कुल 1151 घड़ियाल थे, जिनकी संख्या रविवार को बढ़कर 1161 हो गई है। इसी तरह नदी में 408 मगरमच्छ व 71 डॉल्फिन हैं। हालांकि वर्ष 2016 में होने वाली नई सर्वे के बाद इन आंकड़ों में इजाफा होने का अनुमान है।

देवरी में लेते हैं जन्म, नदी में करते हैं सरवाइब
मुरैना के देवरी में घड़ियाल संरक्षण प्रोजेक्ट के तहत घडिय़ालों का प्रजनन केंद्र बनाया गया है। इस केंद्र पर अंडों को ले जाया जाता है, जिनसे बच्चे निकलते हैं। वहां कर्मचारियों की देखरेख में यह बच्चे बड़े होते हैं और उनको अलग-अलग पानी के पूल में रखा जाता है। इन घड़ियाल में टैग भी लगा देते हैं। इनको पकड़ने के लिए कर्मचारियों को पूल का पूरा पानी खाली करना पड़ता है।

पहले चित्र में चंबल में छोड़ते वाटागुर प्रजाति के दुर्लभ कछुए। दूसरे व तीसरे चित्र में बॉक्स से निकलते घड़ियाल व रखे बॉक्स।

4 फरवरी से जारी है जलीय जीवों की गणना

नदी में 35 से 40 किमी का सफर कर रही है टीम

भास्कर संवाददाता | भिंड

चंबल सेंक्चुरी में अटेर घाट पर रविवार को 15 नन्हे घड़ियाल और 10 वाटागुर कछुए छोड़े गए। इस पूरी साल में 121 घड़ियाल नदी में छोड़े जाएंगे। इसकी शुरूआत भिंड से की गई है। घड़ियाल की पूंछ में सेंक्चुरी के ऑफिसर्स ने टैग भी लगाए हैं, ताकि उनकी लगातार मॉनीटरिंग हो सके।

सेंक्चुरी के रेंजर डॉ. ऋषिकेश शर्मा रविवार को जिले के अटेर घाट पर घड़ियाल और कछुओं को मुरैना के देवरी प्रजनन केंद्र से लेकर आए। इन घड़ियाल का जन्म जून 2011 में हुआ था। इनकी लंबाई 1.2 मीटर है। इसके अलावा विलुप्त होती वाटागुर प्रजाति के कछुओं का जन्म वर्ष 2013 में हुआ है। इन सभी को अटेर घाट पर नदी के स्वच्छ पानी में छोड़ा गया। इससे पहले इन सभी जलीय जीवों का वेटनरी डॉक्टर से परीक्षण भी कराया गया।

वागुरा प्रजाति के हैं कछुए
चंबल नदी में इस साल 121 घड़ियाल छोड़े जाने हैं, जिनकी शुरूआत रविवार को भिंड के अटेर घाट से हुई। यहां 15 घड़ियाल और 10 कछुए नदी में छोड़े हैं। यह कछुए वागुरा प्रजाति के हैं, जो कि विलुप्त की कगार पर है। डॉ. ऋषिकेश शर्मा, रेंजर चंबल सेंक्चुरी

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