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दिन में सर्द हवाएं, रात में बारिश

7 वर्ष पहले
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बीना। दिसंबर से शुरू हुई सर्दी दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। शनिवार को सुबह से शाम तक सर्द हवाएं चलीं और रात होते-होते तेज बारिश होने लगी, जो करीब एक घंटे हुई। शनिवार को सुबह से बादलों की ओट में सूर्य रहे। इस कारण ठिठुरती ठंड का अहसास लोगों को हुआ। रोजाना के कार्यों के लिए लोगों को गर्म कपड़े पहनकर निकलना पड़ा। दिन भर ठंडी हवाएं चलती रहीं। शाम सात बजे के बाद हल्की-हल्की बूंदा बांदी शुरू हुई। जो थोड़ी देर बाद तेज बारिश में बदल गई।
बारिश के कारण शहर की गति रुक कई और लोगों ने बारिश से बचने के लिए शेडों का सहारा लिया। शुक्रवार को भी शाम के समय से शुरू हुई बारिश रुक-रुक कर रात भर होती रही।
रात तीन बजे के बाद बंद हुई बारिश से जहां किसान खुश थे वहीं कपड़ा व्यावसायियों की पूछ परख भी बढ़ गई थी। शनिवार को जैसे ही बारिश शुरू हुई किसानों ने खेतों की ओर रुख किया। मावठे की बारिश से किसानों को प्रसन्नता हुई।
बीना, खुरई, रहली, राहतगढ़ सहित ग्रामीण अंचलों में बरसा पानी, ठंड बढ़ी, किसान खुश
खुरई. शीतलहर के साथ शनिवार की शाम बूंदाबांदी के साथ तेज बारिश हुई जिससे ठंड बढ़ गई और लोग अलाव जलाने लगे। पहले रुक-रुककर बारिश होती रही जिससे किसानों के चेहरे खिल गए है। किसानों का कहना है मावठ का इंतजार था।

किसान संदीप, संजय बजाज का कहना है कि पानी गिरने से फसल को लाभ हो रहा है। सिंचाई का खर्च बचेगा, साथी पानी से एक जैसी सिंचाई होती है। किसानों का कहना है लगातार तीन फसलें प्रकृति की मार में बर्बाद हो गईं हैं। इस साल उम्दा फसल की आस की थी लेकिन गांवों में लगे ट्रांसफॉर्मर निकाले जाने से सिंचाई की समस्या हो गई थी। इस साल फिर लग रहा था कि फसल उम्दा नहीं होगी लेकिन िपछले दो दिन से गिर रहे मावठे से उम्मीद बढ़ गई है। अब खर्च भी बचा है और फसल अच्छी होने की आस है।
दूसरे दिन शीतलहर ने जलवाए अलाव।

(बीना में दूसरे दिन शनिवार को भी बारिश हुई। शीतलहर चलने से ठंडक हो गई है।)