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नगर पालिका में नहीं मिला स्टाफ को वेतन

6 वर्ष पहले
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बीना | नगरपालिकाका स्थापना खर्च बढ़ने पर राज्य सरकार पर आए आर्थिक संकट का असर अब क्षेत्रीय संस्थाओं पर भी पड़ने लगा है। नगरपालिका के कर्मचारियों को लगातार दूसरे माह समय पर वेतन का भुगतान नहीं हुआ।

फरवरी माह के दस दिन बीत चुके हैं। लेकिन नगरपालिका कर्मचारियों को अभी तक वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। नगरपालिका को पहली तारीख में चुंगी क्षतिपूर्ति की जो राशि जाती थी, वह नहीं आई है। यह राशि 40 से 55 लाख तक आती है। इसके अलावा मूलभूत एवं अन्य मदों की राशि भी नहीं मिली है। लगातार भर्ती किए जाने से नगरपालिका का स्थापना खर्च भी 65 से बढ़कर 75 प्रतिशत हो चुका है। जबकि नियमानुसार स्थापना खर्च नगरपालिका को होने वाली शुद्ध प्राप्ति का 65 प्रतिशत होना चाहिए। सीएमओ हरिओम वर्मा ने बताया कि अभी तक राशि नहीं आने के कारण स्टाफ को वेतन नहीं दिया जा सका है। जैसे ही राशि आएगी, वेतन दे दिया जाएगा।

कलेक्टरसे शिकायत की : नगरपालिकामें हुई अंधाधुंध भर्तियों को लेकर बेरोजगार युवकों द्वारा कलेक्टर, एसडीएम, मुख्यमंत्री, लोकायुक्त में की गई है। शिकायत करने वाले कपिल राजपूत, रोशन रजक, बसंत श्रीवास्तव, हरि सेन, सोनू लोधी, मुकेश अहिरवार, संजीव पाल का कहना है कि एक तरफ सरकार यह कहती है कि उसके पास खर्च करने पैसा नहीं है दूसरी तरफ स्थानीय संस्थाओं में अधिकारी रुपए लेकर भर्ती करते जाते हैं। इन बेरोजगारों ने अक्टूबर 2014 में हुई भर्तियों का हवाला देते हुए कहा कि बिना अनुमति के सीएमओ ने 21 भर्तियां कीं। इससे नपा पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इन्हें निरस्त किया जाना चाहिए।