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वाहे गुरु के जयकारों के बीच निकले पंजप्यारे

7 वर्ष पहले
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अव्वलअल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे,। यह संदेश गुरुनानक देव साहब ने हमें दिया था। जिस पर हमें चलना है। हम सब बंदे ईश्वर के हैं। हमें उनमें ही अल्लाह को देखना है। यह संदेश ज्ञानी राय सिंह ने गुरुनानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारा श्रीकलगीधर साहब में दिया। गुरुद्वारे में इस अवसर पर तीन दिन से चल रहे अखंड पाठ का समापन हुआ। रात 9 बजे बच्चों का कवि दरबार सजा। जिसमें नानक देव की कविताएं, जीवनी, विचार एवं लेखन संबंधी प्रतियोगिताएं रखी गईं। गुरुद्वारे में ही लंगर का आयोजन भी किया गया, जिसे सिख धर्म के अतिरिक्त अन्य लोगों ने भी जमकर चखा। इस दौरान महेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, अवतार सिंह, रघुवीर सिंह, प्रेम सिंह, गुरजीत सिंह, गुरदयाल सिंह, मलिक सिंह, डिंपल सिंह, जसविंदर सिंह, सोनू अरोरा, गोल्डी अरोरा सहित अन्य शामिल हुए।

शहरमें निकली प्रभातफेरी : गुरुनानकजयंती के अवसर पर सिख समाज द्वारा सुबह प्रभात फेरी निकाली गई। गुरुद्वारे से शुरू हुई प्रभात फेरी महावीर चौक, मां जागेश्वरी मार्ग, इटावा, सर्वोदय चौराहा, कॉलेज तिराहा, गांधी तिराहा होते हुए वापस गुरुद्वारा पहुंची।

सिंधीसमाज ने भी मनाई जयंती

गुरुनानकदेव जी की जयंती पर सिंधी समाज द्वारा पाठक वार्ड स्थित धर्मशाला में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दिन भर समाज की दुकानें बंद रखी गईं। सुबह प्रभात फेरी निकाली गई।

बीना में गुरुनानक देव जी की जयंती पर गुरुद्वारा कलघीधर साहिब में शब्द कीर्तन हुआ। कीर्तन में शामिल महिलाएं।