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लापरवाही छिपाने बंद कर दी डेंगू की जांच

7 वर्ष पहले
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ब्यावरा|शुक्रवारसुबह 11 बजे तहसील रोड निवासी एसडीएम कार्यालय में चपरासी पद पर पदस्थ मोहनलाल मेवाडे़ 50 वर्ष की भोपाल के चिरायु अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। एसडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार श्री मेवाड़े बीते कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित चल रहे थे।

सिविल अस्पताल में डेंगू रेपिड कार्ड से टेस्ट नहीं किए जा रहे।

ब्यावरा। अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की कतार।

यह हैं हबीपुरा के हालात

शहरसे चार किमी दूर गांव हबीपुरा में डेंगू पीड़ित युवक के घर के सामने की गंदगी अब तक नहीं उठाई गई। इसके अलावा हैंडपंप स्कूल परिसर के पास भी सफाई नहीं है। यहां रुके हुए पानी में मच्छर पनप रहे हैं। अब भी गांव में कई लोग लंबे समय से बुखार उल्टी दस्त से पीड़ित हैं।

दो-दो मरीजों की पहचान के बाद मोल ले रहे खतरा

पड़ानामें तीन सप्ताह पहले एक 12 वर्षीय बालिका की डेंगू के मरीज के रूप में पहचान होने और दो मौतों के बाद चार दिन पहले ब्यावरा में ओम शाक्यवार के ब्लड में डेंगू के लक्षण मिले थे। इसे भोपाल रेफर कर दिया गया है। गांव हबीपुरा निवासी पर्वत वर्मा को भी डेंगू की पुष्टि के बाद भोपाल के चिरायु अस्पताल में भर्ती कराया गया।

नहींलिया सैंपल

हबीपुरागांव में पर्वत वर्मा पिछले सप्ताह ब्लड टेस्ट के बाद डेंगू की पुष्टि हुई थी। भोपाल के चिरायु अस्पताल में इलाज चला। एक सप्ताह बाद मरीज जब वापस गांव गया है। इसके बाद गुरुवार को गांव में मलेरिया परीक्षण शिविर लगाया। गांव के फूलसिंह वर्मा ने बताया कि एक दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव की पुष्पा बाई सहित एक अन्य युवक का ब्लड सैंपल लिया। बाकी लोगों का सेंपल नहीं लिया गया।

बंद कर दिया रेपिड कार्ड टेस्ट

जिलेमें डेंगू बीमारी की पहचान हो इसके लिए ब्यावरा सिविल अस्पताल में प्रबंधन ने डेंगू रेपिड कार्ड टेस्ट करना बंद कर दिया है। बीते पांच दिनों से यहां किसी भी बीमार की जांच के लिए इस कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया गया। यही हाल राजगढ़ जिला अस्पताल में है। यहां भी डॉक्टर कर्मचारी रेपिड कार्ड टेस्ट नहीं कर रहे ताकि जिले में मरीजों को डेंगू की प्रारंभिक पुष्टि हो सके। इधर रेपिड कार्ड टेस्ट नहीं होने से खतरनाक बुखार से पीड़ित दर्जनों मरीजों को जांच के लिए निजी पैथॉलाजी के अलावा भोपाल, शाजापुर, इंदौर या उज्जैन आदि शहरों में जाना पड़ र