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क्षेत्र में नहरें बंद होने से सूख रही पांच हजार हेक्टेयर की फसलें

5 वर्ष पहले
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सिंचाई विभाग और कुशलपुरा वृहद सिंचाई परियोजना के जिम्मेदारी अधिकारियों की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। शासन ने कुशलपुरा डेम से क्षेत्र की दस हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई को लक्ष्य रखा था। इसमें इस साल करीब पांच हजार हेक्टेयर जमीन में फसलें बोई गई हैं, जिन्हें विभाग ने एक व दो पानी देकर नहरें बंद कर दी हैं। इससे फसलें सूखने की कगार पर हैं। खेतों में सूख रही लहलहाती फसलों को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

कुशलपुरा मध्यम बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना किसानों के लिए फ्लाप साबित हो गई है। इस परियोजना के माध्यम से किसानों की जमीन तक पानी पहुंचाने के लिए दाईं और बायीं दो नहरें निकाली गई हैं। इन पर खुदाई से लेकर पक्की करने में 21 करोड़ रुपए से भी अधिक की राशि खर्च की गई है। इसके बावजूद कुशलपुरा डेम नहर क्षेत्र के किसानों को पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। खेतों में कहीं एक तो कहीं दो पानी देने के बाद डेढ़ माह में ही डेम से सिंचाई का पानी खत्म हो गया। इससे नहरें बंद कर दी गईं। फसलों को करीब डेढ़ माह से पानी नहीं मिला है। इससे 5 हजार हेक्टेयर जमीन पानी के लिए मुंह फाड़ रही है, उसमें खड़ी फसल पानी के इंतजार में अंतिम सांस ले रही है। इससे किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।

डेम से निकाली गई दोनों नहरें तीन साल से चालू की गई हैं, मगर एक बार भी ठीक से किसानों को पर्याप्त पानी नहीं दिया गया है। पिछले दो वर्ष तो नहर लीकेज, पुलिया निर्माण टूटने व नहरें कच्ची होने के कारण बार-बार बंद होने से फसलें प्रभावित हो रही थीं। डेम में सिंचाई का पानी खत्म होने से 5 से 7 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की फसल पानी के इंतजार में सूख रही है।

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी
किसानों की फसलों का पानी बंद करने के बाद विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों ने अधिक पानी वाली फसलें बो दी हैं। इससे पानी अधिक लग गया है। वहीं टारगेट भी अधिक होने से पानी कम पड़ने के हालात बन रहे हैं। अब विभाग ने किसानों को अपने हाल पर छोड़ दिया है।

किसानों की तीसरे साल प्रभावित हो रहीं फसलें
कुशलपुरा डेम से नहरों में तीन साल से पानी छोड़ा जा रहा है, मगर विभागीय अधिकारियों की कमियों से हजारों किसानों की फसलें लगातार तीन साल से प्रभावित हो रही हैं। पहले साल दिसंबर 13 में पानी छोड़ने के कुछ ही दिन बाद भैसानी गांव के पास नाले की पुलिया धराशायी होने से नहर बंद हो गई। दूसरे साल दिसंबर में नहरों जगह-जगह फूटने, लीकेज होने सहित पानी आगे नहीं पहुंचने से बोई गई फसलें प्रभावित हुई थीं। अब इस साल किसानों ने नहर से कई किमी दूर तक खेतों में गेहूं, चना, धनिया, मसूर, चना, प्याज, लहसुन सहित विभिन्न सब्जियों की बुवाई कर दी थी। इसमें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पानी छोड़ा गया। इससे दिसंबर में दो पानी फसलों को मिल गया। इयके बाद से नहर सूखने से फसलें भी सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।

किसानों के लिए फ्लाप साबित हुई कुशलपुरा मध्यम बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना
नहरों पर एक नजर
डेम से दायीं और बायीं तरफ दो नहरें निकाली गई हैं। दोनों नहरें 38 किमी लंबी हैं। बायीं नहर 11 किमी व दायीं नहर 27 किमी लंबी है। इनसे करीब 7 हजार हेक्टेयर रकबे में सिंचाई होना है। तीन साल पहले शुरू हुई नहरों में इस साल 20 किमी दूर तक पानी पहुंचा था। दायीं नहर से भैसानी, गेहूंखेड़ी, राजपुरा, भीलवाड़िया, गूजरीबे, पनाली, करनवास, माधोपुरा, किशनपुरिया, टांडी, सूरज खेड़ी, भोपालपुरा सहित 15 गांवों और बायीं तरफ की नहर से सुंदरहेड़ा, खजूरिया, जरकड़ियाखेड़ी, बरग्या, परसूलिया, मोहनपुरा सहित 10 गांव के किसानों को पर्याप्त पानी मिलना था।

टारगेट अधिक होने से बनी स्थिति
विभाग द्वारा डेम से सिंचाई का टारगेट अधिक दिया गया था। वहीं नहर के ऊपर क्षेत्र के किसानों ने अधिक पानी ले लिया है। वहीं किसानों ने अधिक पानी की फसलों की बुवाई कर दी है। पूरी फसल चौपट नहीं हो रही है। कई किसान डेम से पाइप लाइन डालकर पानी ले रहे हैं। -जीएस भरादिया, एसडीओ, सिंचाई विभाग ब्यावरा

पानी न छोड़ने से सूखी पड़ी हैं क्षेत्र की नहरें, किसान फसलों को देखकर चिंतित
सूखती फसलों को लेकर चिंता में पड़े किसान।

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