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सिविल अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में हुईं डिलेवरी
परेशान मरीज सहित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन द्वारा बंद कराए गए गेट का विरोध किया। साथ ही रविवार दोपहर इसके विरोध में इकट्ठा हुए नागरिकों ने जमकर नारे बाजी कर हंगामा मचाया। इनका कहना था कि इस बेतुके फैसले से उनकी कठिनाई और बढ़ जाएगी। गेट खुलवाने के लिए रविवार को बाईहेड़ा गांव निवासी जगदीश, बाजपुरा गांव निवासी राकेश मीना सहित अन्य दर्जनों परिजनों मरीजों का कहना था कि बिना वैकल्पिक इंतजार मेनगेट बंद करने से मरीजों को खासी परेशानी हो रही हे। अगर इस तरह से प्रयोग किए गए तो अस्पताल की अव्यवस्थाएं कम होने की जगह बढ़ जाएंगी। हंगामा कर रहे लोगों ने गेट नहीं खोलने पर ताला तोड़ने की धमकी भी दी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों का आक्रोश देखते हुए रविवार दोपहर बाद गेट खुलवा दिया।
हंगामे के बाद खोला बंद गेट
^मरीजों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। अगर बिना किसी वजह से मैन गेट बंद करने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। तो इस बारे में सीएस से चर्चा कर उसे खुलवाया जाएगा। जब अस्पताल में जनरेटर अन्य सुविधा उपलब्ध है फिर डिलेवरी के दौरान इनका उपयोग नहीं किए जाने के बारे में संबंधित अधिकारी से पूछताछ कर कार्रवाई करेंगे। -आनंदकुमारशर्मा, कलेक्टरराजगढ़
ब्यावरा। अपनी समस्या बताती महिलाएं।
3
केस
कब : रविवारअल सुबह 4.30
कहां: अस्पतालका जनरल जच्चा बच्चा वार्ड
क्याहालात : बिजलीनहीं होने से प्रसूताएं सहित जनरल वार्ड में भर्ती मरीज परेशान रहे। इनके परिजन नवजात बच्चों सहित अपने संबंधित मरीजों को मच्छरों गर्मी से बचाने के लिए तौलियों से हवा करते नजर आए।
कब : रविवारसुबह चार बजे
क्याहुआ : चौतरागांव की नर्मदी बाई की गर्भवती रिश्तेदार की डिलेवरी भी टॉर्च मोबाइल की रोशनी में की गई। इसमें मेटरनिटी वार्ड स्टाफ सहित गर्भवती महिला के परिजनों को परेशानियां हुईं।
अस्पताल प्रबंधन की बदइंतजामी से यहां भर्ती मरीज सहित गर्भवती प्रसूताओं को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। शनिवार की रात यहां अचानक मामूली फॉल्ट के कारण गई बिजली पांच घंटे बाद आई। बिजली ठीक नहीं होने से अस्पताल में सैकड़ों मरीज अटेंडर अंधेरे में बिना पंखे के परेशान होते रहे।
तीन प्रसूताओं ने अंधेरे में जन्मे बच्चे
मरीजों ने जबरन बंद कराया गेट खुलवाया
दोदिन पहले विधायक के दौरे के बाद अस्पताल परिसर ने उनके कहने पर बारह वर्ष