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ब्यावरा में भी डेंगू का खतरा

7 वर्ष पहले
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ब्यावरा निवासी मूल चंद्र को सितंबर के पहले सप्ताह में डेंगू के प्रारंभिक लक्षण मिले थे। उसे सिविल अस्पताल से इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया था। मरीज के परिजनों ने उसे इंदौर के चौइथ राम अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां उसकी नौ सितंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जांच रिपोर्ट में मरीज को डेंगू पीड़ित होने की बात सामने आई थी।

डेंगू से हुई मौत छिपा गया प्रशासन

जांच रिपोर्ट की सत्यता भी संदिग्ध

जिलेमें सभी स्तर के अस्पतालों स्वास्थ्य केंद्रों में यूं तो मुफ्त जांचों की व्यवस्था है। मगर उपकरणों की खराबी और टेक्नीशियनों की कमी जांच में आड़े रही है। इतना ही नहीं जांच कराने वालों की संख्या में अब सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा है। ऐसे में जल्दबाजी में की जा रही ज्यादा जांच की रिपोर्ट ठीक नहीं रही। प्राइवेट लैब और सरकारी लैब में की जांच में काफी फर्क होने से मरीजों में भ्रम पैदा हो रहा है। मरीज मनीष सक्सेना, सूरज वर्मा और नितिन मेवाड़े ने बताया कि जांच सही नहीं होने से इलाज भी सही नहीं हो पा रहा। इससे मरीजों की जान जाने की नौबत बन रही है।

^डेंगू अन्य बीमारियों की आशंका के चलते एक दिन पहले ही स्वास्थ्य अधिकारियों को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले जनपद पंचायतों नगरीय निकायों को भी सफाई के लिए निर्देशित किया जा चुका है। अगर अब भी कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। -आनंदकुमारशर्मा, कलेक्टरराजगढ़

जांचमें नहीं दिलचस्पी

जिलेमें जगह-जगह डेंगू की प्राथमिक पुष्टि के बावजूद अस्पतालों में बीमारी की प्रारंभिक जांच के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे। जिला सिविल अस्पताल सहित स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू रेपिड टेस्ट कार्ड उपलब्ध कराए हैं लेकिन अधिकांश जगह इन कार्डों का उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में मरीज में बीमारी के लक्षण बढ़ने तक खतरनाक बुखार का पता नहीं चल पा रहा। यही वजह है कि जिले में अब तक खतरनाक बुखार से तीन मौतें हो चुकी हैं।

एकऔर संदिग्ध मरीज किया रेफर

अबसिविल अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराए राजगढ़ रोड निवासी ओम शाक्यवार में डेंगू बुखार के प्रारंभिक लक्षण मिले हैं। अस्पताल के डॉ सोरेन दत्ता ने बताया कि मरीज को डेंगू रेपिड कार्ड से टेस्ट किया था। इसमें पता चला कि युवक में इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षण हैं। टेस्ट रिपोर्ट के