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अब मिली सच्ची आजादी, रोशनी देख बूढ़े चेहरे पर आई खुशी
आजादीके बाद घर में पहली बार रोशनी देख 75 साल की सुशीलाबाई सोहनलाल के चेहरे पर बुधवार को खुशी का उजाला बिखर गया। इसी घर में आजादी की लड़ाई देख चुकी सुशीलाबाई की बूढ़ी आंखें रोशनी से चुंधियाई नहीं बल्कि बल्ब पर एकटक ठहर गई। सुशीलाबाई की गरीबी और उम्र देख बिजली कंपनी अफसरों ने उसके घर में नया मीटर लगाने के साथ 15 वॉट का बल्ब लगाया है। महीने का करीब 100-150 रुपए बिल भी अफसर ही वहन करेंगे। 10 गुणा 10 के अपने घर में पहली बार उजाला देख सुशीलाबाई के मन से दुआओं की रोशनी भी जगमगा उठी। घर में बल्ब लगाने पहुंचे अफसरों को उसने चाय बनाकर पिलाई।
कोलीवाड़ा के रणछोड़ मंदिर के पास सुशीलाबाई अकेली रहती हैं। पति का काफी पहले निधन हो चुका है। कमजोर हो चुकी याददाश्त के कारण वह पति के निधन का साल तक नहीं बता पाती। दो बेटियों में से बड़ी किरण की शादी बुरहानपुर और छोटी रेखा की शादी नावरा में हुई है। बूढ़ी याददाश्त को खंगालते सुशीलाबाई बताती हैं 1948 में गांधीजी की अस्थियां विसर्जन के लिए लाने के दौरान वह 6 साल की थी। वह पिता के साथ अस्थी विसर्जन देखने ताप्ती नदी के सतियारा घाट गई थी। वह यादें आज भी ताजा हैं।
घर में पहली बार उजाला देख सुशीलाबाई खुश हो गई।
75 साल की उम्र में भी सुशीलाबाई पांच घरों में बर्तन मांजकर अपना गुजारा कर रही हैं। तांगा चलाने वाले पति के निधन बाद वह तंगहाली में रह रही है। सरकारी पेंशन भी नहीं मिलती। सुबह-शाम तीन-तीन घंटे घरों में बर्तन मांजकर वह 600-700 रुपए कमा लेती है। मीटर और बल्ब लगाने बुधवार शाम 4 बजे सुशीलाबाई के घर पहुंचे कार्यपालन यंत्री जेआर कनखेरे ने बताया जिले में पहली बार किसी गरीब को बिजली कंपनी की ओर से नि:शुल्क कनेक्शन दिया गया है। इस दौरान कनिष्ठ यंत्री एसके पुनीवाला, सहायक यंत्री आरके दीक्षित, प्रकाश महाजन, भगवान महाजन भी मौजूद थे। कोलीवाड़ा के 75 वर्षीय धन्नालाल भीमसेन कोली ने भी आजादी बाद से घर में रोशनी नहीं देखी है। अफसरों ने उसे भी मदद का आश्वासन दिया।