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आए थे नसबंदी कराने, 6 घंटे रहे भूखे-प्यासे, गुस्सा फूटा
भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर
परिवारकल्याण कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में मंगलवार को प्रतिष्ठा नसबंदी शिविर लगाया गया। सुबह 9 बजे से कई महिलाएं और पुरुष शिविर में पहुंचे। दोपहर 2.30 बजे तक वे भूखे-प्यासे यहां डॉक्टर का इंतजार करते रहे। कई महिलाएं छोटे बच्चों को लेकर परिसर में घूमतीं रहीं। दोपहर 3 बजे तक डॉ. एलएम पंत अस्पताल नहीं पहुंचे तो महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। डॉ. पंत के लेट होने पर आशा और उषा कार्यकर्ताओं ने भी नाराजगी जाहिर की। महिलाओं को डॉ. बीडी शर्मा शांत करने पहुंचे।
डाकवाड़ी से बेटी रुपाली किरण को लेकर पहुंची लताबाई नंदू राठौर ने कहा सुबह से खाना नहीं खाया। छोटे बच्चों को लेकर आए हैं। डॉक्टरों के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। लेकिन छह घंटे बाद भी उनका कोई पता नहीं। मालवीय वार्ड के जितेंद्र भावसार ने कहा प|ी मनीषा का ऑपरेशन कराने आया हूं। बेटी देवांशी चार महीने की होने से संभालने के लिए बड़सास ममता वाघमारे को बुलाया। मनीषा को दो बार इंजेक्शन लगाकर सुलाया। गर्मी के कारण यहां महिलाएं-बच्चे बेहाल होते रहे।
लक्ष्य से 1 तिहाई महिलाओं के हुए ऑपरेशन
डॉ.बीडीशर्मा ने बताया शिविर में 100 नसबंदी ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया था। जिला अस्पताल के शिविर में 29 एलटीटी, 1 एनएसवीटी और 5 ओपन ओटीटी के पंजीयन हुए। दोपहर 3.30 बजे से महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन शुरू हुए। शाम 4 बजे तक डॉ. एलएम पंत ने महिलाओं के ऑपरेशन किए। शाहपुर अस्पताल में भी नसबंदी के ऑपरेशन हुए। डॉ. पंत ने शाहपुर में कुल 26 ऑपरेशन किए।
डॉ. एलएम पंत के लेट होने पर स्वास्थ अफसर-कर्मी लोगों को शांत करने में जुटे रहे।