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शिक्षित कर 282 अनाथ बेटियों की कराई शादी

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

पुणे की 70 वर्षीय सिंधुताई सपकाल। यह हजारों अनाथाें के लिए आई है। 1050 से अधिक अनाथों को गोद लिया। 282 से अधिक बेटियों को शिक्षित कर शादी कराई। 49 से ज्यादा बेटाें को उन्होंने ग्रेजुएट बना दिया। उनके परिवार में अब 200 से अधिक दामाद और 40 से अधिक बहुएं हैं। 1 हजार से भी ज्यादा पोते-पोतियां है। उनकी खुद की बेटी वकील है। उनके गोद लिए बच्चे डॉक्टर और वकील हैं।

घरवाले (सिंधुताई) बेटी को बोझ समझते थे। वो 10 साल की थी। 30 साल की उम्र के श्रीहरि सपकाल से शादी कराई। ससुराल पक्ष से तिरस्कार झेलना पड़ा। पति के छोड़ने पर मायके में आस लेकर पहुंची। जब यहां भी सहारा नहीं मिला तो ट्रेनों में गाने गाकर भीख मांगने लगी। बदमाशाें के डर से श्मशान में रातें गुजारी। जलती चिता पर रोटी पकाकर खाई। एक बेटी को दगड़ू सेठ हलवाई ट्रस्ट में गोद दी। जीवन में जब ठोकरों से सीख मिली तो अनाथों का सहारा बनी। उनके गोद लिए कई बच्चे अनाथ आश्रम चला रहे हैं। पूना, वर्धा, सासवड़ में अनाथ आश्रम है। 2010 में सिंधुताई पर मराठी फिल्म बनी। लंदन के 54वें फिल्म महोत्सव में चुना गया। उन्हें 273 राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। अब तक 14 देशों में उनका व्याख्यान हुआ है। उनका पहला व्याख्यान इंग्लैंड में हुआ था। 80 साल की उम्र में पति श्रीहरि उनके साथ रहने आए।

माफ करना सीखो, बेटा-बेटी में फर्क मत करो
शाहपुर के दशावतार कार्यक्रम में सिंधुताई का व्याख्यान हुआ। उन्होंने कहा- मैंने अपने पति को एक बेटे के रूप में स्वीकार किया। मैं अपनी मां का आभार प्रकट करती हूं क्योंकि पति के घर से निकाले जाने के बाद मेरी मां ने मुझे घर में सहारा दिया होता तो आज मैं इतने बच्चों की मां नहीं बन पाती। उन्होंने कहा- हर व्यक्ति को माफ करना सीखो। बेटा-बेटी में फर्क मत करो। तलाक को बंद करो। जीवन एक बार मिला है आत्महत्या से इसे व्य्थ नहीं करें। जीवन को आधार बनाओ। किसी का सहारा बनो।

विक्रमसिंह चौहान ने प|ी अंजली के साथ सिंधुताई सपकाल की सेल्फी ली।

बेसहारा का सहारा
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