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कर्नाटक की गन्ना फैक्ट्री से भागकर लौटे 18 बंधुआ मजदूर, महिलाएं-बच्चे शामिल

7 वर्ष पहले
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कर्नाटकके धौंड के एक शकर कारखाने में बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहे खकनार क्षेत्र के 18 आदिवासी भागकर गुरुवार रात बुरहानपुर पहुंचे। शुक्रवार सुबह वे गांव जाने के लिए बस स्टैंड पहुंचे तो मामले का खुलासा हुआ। भागकर आए आदिवासियों में पांच पुरुष, तीन महिलाएं और 10 बच्चे भी शामिल हैं। शकर कारखाने में इन्हें बंधुआ बनाकर 25 दिन तक काम कराया गया। काम नहीं करने पर उनकी पिटाई भी की गई। कारखाने के लोग उनको किसी से बात तक नहीं करने देते थे। उन्हें काम के बदले मजदूरी भी नहीं दी गई।

धाबा निवासी डोंगरसिंग मालसिंग और खेमा खावट्या ने बताया एक महीने पहले छोटी खकनार निवासी दादू कोरकू क्षेत्र के 16 परिवार के लोगों को काम दिलाने के बहाने महाराष्ट्र ले गया था। इसमें महिला, पुरुष सहित 40 से अधिक बच्चे शामिल थे। महाराष्ट्र में उसने सभी को बाड़ा टांडा निवासी दलाल बाबूराव गायकवाड़ और सिरसोदा निवासी विट्‌ठल के सुपूर्द कर दिया। इन दोनों ने हमको कर्नाटक के दलालों को सौंप दिया। दलालों ने फैक्ट्री में 600 रुपए रोज के हिसाब से मजदूरी दिलाने की बात कही। लालच में आकर हमने दिन-रात काम किया। मांगने पर मजदूरी भी नहीं दी। खाने के लिए ही सामान देते थे। सभी से जानवरों जैसा व्यवहार किया गया। इससे बच्चे बीमार पड़ने लगे थे। धाबा निवासी सुनील चौहान ने बताया बुधवार रात फैक्ट्री के गेट पर तैनात चौकीदार शराब पीने चला गया। मौका देखकर हम चार परिवार के लोगों ने अपना सामान समेटा और 18 लोग यहां से निकल गए। धौंड से सभी उसी रात ट्रेन में सवार हुए। बुरहानपुर स्टेशन पर सभी गुरुवार देर रात पहुंचे। स्टेशन पर सभी ने रात बिताई। सुबह सभी खकनार जाने के लिए पुष्पक बस स्टैंड आए। यहां उन्होंने कुछ लोगों को पूरी कहानी बताई। आदिवासियों ने बताया कर्नाटक के धौंड के शकर कारखाने में अब भी 12 परिवार के 25 लोग बंधुआ मजदूर बनाकर रखे गए हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

कर्नाटक की गन्ना फैक्ट्री से जान बचाकर 12 परिवार पुष्पक बस स्टैंड पर लौट आए।