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ग्रामीण क्षेत्रों में नाबालिगों से ज्यादती का ग्राफ बढ़ा

7 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत 6 महीने में प्रथम अपर सत्र न्यायालय रवींद्रसिंह की कोर्ट ने नाबालिग बालिकाओं के साथ ज्यादती के मामले में 26 आरोपियों को सजा सुनाई है। जुलाई से नवंबर तक 40 केस न्यायालय में आए। इसमें कुछ में न्यायालय के बाहर आपस में समझौता कर लिया गया। शेष में पुलिस के साक्ष्य, दस्तावेज, एफएसएल, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर 7 से 10 साल की सजा सुनाई है। पास्को एक्ट के अधिकतर मामले ग्रामीण क्षेत्रों के है। शहर में ऐसे मामलों की संख्या कम है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक जाहिद हुसैन चौधरी के मुताबिक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के लिए बने लैंगिग अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम यानी पासको एक्ट दुराचार की धारा के तहत प्रकरण में न्यायालय द्वारा सख्ती और त्वरित निर्णय दिया जा रहा है। इससे अपराधियों में डर पैदा हो रहा है। मामलों के त्वरित निराकरण से समाज में एक अच्छा संदेश जा रहा है। साथ ही इस तरह के अपराधों में भी कमी देखी जा रही है।

लोग हो रहे जागरूक

अतिरिक्तलोक अभियोजक जाहिद हुसैन चौधरी ने बताया लैंग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत सबसे अधिक मामले खकनार, शाहपुर, निंबोला और नेपानगर में दर्ज हुए है। इस एक्ट से लोग जागरूक हो रहे है। इस तरह के मामलों में पीड़ित, लोक लज्जा और डर के कारण रिपोर्ट दर्ज कराने पुलिस थाने नहीं जाते थे। लेकिन अब लोगों में जागरुकता आई है। अब पीड़ित बेखौफ होकर थानों में रिपोर्ट करने पहुंच रहे है।

यहहै अधिनियम

लैंगिकअपराधों से बालकों को संरक्षण अधिनियम 2012 उन पीड़ित बालिकाओं के संबंध में लागू है जिनकी उम्र 18 साल से कम है। शहर में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया पेट्रोलिंग वाहन संचालित हो रहा है। यह स्कूल, कॉलेज सहित समस्त सार्वजनिक स्थानों पर नजर रख रहा है। इससे छेड़छाड़ के मामलों में भी कमी आई है।