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जिले के जंगलों में 22 तेंदुए, वन िवभाग बेखबर

7 वर्ष पहले
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जिलेके जंगलों में करीब 22 तेंदुए हैं। यह डेढ़ लाख हेक्टेयर जंगल में मौजूद हैं। नेपानगर क्षेत्र के 60 हजार हेक्टेयर, खकनार क्षेत्र के 38 हजार, शाहपुर क्षेत्र के 20 हजार और धुलकोट क्षेत्र के 15 हेक्टेयर जंगल और इसके आसपास तेंदुए देखे जाते रहे हैं। खकनार, जंबूपानी, सोलाबलड़ी, गढ़ताल, बसाली, उतांबी सहित अन्य क्षेत्रों में कई बार तेंदुए दिखे हैं।

मेलघाट टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटा होने के कारण खकनार और टाइगर सेंचुरी से सटा होने के कारण जंबूपानी में इनकी मौजूदगी अधिक रही है। विभाग के अनुसार हर चार साल में एक बार वन्य प्राणियों की गिनती की जाती है लेकिन पिछले आठ साल से यह काम नहीं किया गया। विभाग भी इस बात को मानता है कि जिले के जंगलों में करीब 22 तेंदुए हैं। लेकिन विभाग के पास मात्र तीन पिंजरे हैं। मैदानी अमला भी प्रशिक्षित नहीं है। हाल ही में नेपानगर में एक तेंदुए को पकड़ने में विभाग को 15 दिन लग गए थे। डीएफओ एके सिंह इनके प्रशिक्षित होने का दावा कर रहे हैं। तेंदुआ दिखाई देने पर विभाग इंदौर सहित अन्य बाहरी जिलों की रेस्क्यू टीम पर निर्भर है। अकेले नेपानगर के जंगल में ही करीब 7 तेंदुए हैं। इनमें तीन मादा और चार नर हैं। इनके तीन-चार शावक भी हैं।

तेंदुआ: कुछ खास बातें

>स्वस्थवयस्क तेंदुए का वजन करीब 200 किलो तक हो सकता है।

> ऊंचाई डेढ़ मीटर और लंबाई ढाई मीटर तक होती है।

> अपनी प्रजाति के अन्य प्राणियों के बजाय तेंदुआ पेड़ पर चढ़ने में माहिर होता है।

> होश संभालने के बाद डेढ़ साल की उम्र से हीे शावक शिकार करने लगते हैं।

> तेंदुए की अधिकतम उम्र करीब 10 साल होती है।

डिवीजन लेवल पर 10 लोगों की रेस्क्यू टीम

डीएफओएके सिंह ने बताया फिलहाल विभाग द्वारा वन्य प्राणियों की गिनती नहीं की जा रही है। सिर्फ हेबीडेट असिस्टमेंट करते हैं। इसमें देखते हैं कि जंगल में वन्य प्राणियों की उपस्थिति कैसी और कितनी है। यहां परिस्थितियां उनके लिए कैसी है। इसकी रिपोर्ट बनाकर देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भेजते हैं।

तेंदुआ पकड़ना काफी कठिन- टीम प्रभारी

हालही में तेंदुआ पकड़ने के लिए इंदौर से आई रेस्क्यू टीम के प्रभारी शेरसिंह कटारे कहते हैं मप्र में चार ही टीम प्रशिक्षित हैं। 2006 में ये टीम बनाई गईं थीं। अब डिवीजन स्तर पर भी टीम बनाने के निर्देश हैं। इंदौर-झाबु